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'कोई भूखा तो नहीं', सेवादारों द्वारा यह पूछ कर बंद किए जाते हैं इस मंदिर के कपाट

  • Edited By neetu,
  • Updated: 08 Sep, 2020 06:05 PM
'कोई भूखा तो नहीं', सेवादारों द्वारा यह पूछ कर बंद किए जाते हैं इस मंदिर के कपाट

कहते हैं सच्चे व श्रद्धा से भगवान की भक्ति करने से उनकी कृपा मिलती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि भगवान हमेशा अपने भक्तों द्वारा पुकारने पर उनके पास दौड़े चले आते है। वे कभी भी अपने सच्चे भक्त को दुखी या कष्ट में नहीं देख सकते हैं। ऐसे में ही एक मंदिर ऐसा है जहां पर भक्तों के लिए हमेशा ही दरवाजे खुले रहते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव के इस मंदिर में गरीबों, बेसहारा लोगों को खाना खिलाया जाता है। साथ सही मंदिर के बंद होने के समय पर पहले सभी से पूछा जाता है कि, 'कोई भूखा तो नही'। ऐसे में इस मंदिर से कोई भी खाली पेट नहीं जाता है। 

केरल के कोट्टयम जिले में स्थापित है वाईकॉम महादेव मंदिर 

भगवान शिव का यह मंदिर केरल के कोट्टयम जिले में स्थापित है। इस मंदिर का नाम 'वाईकॉम महादेव मंदिर' है। यह दक्षिण भारत का बेहद प्राचीन और आस्था से भरे मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में भूखों को अन्न खिलाने की प्रथा सदियों से निभाई जा रही है। कहा जाता है कि मंदिर की रसोई में प्रतिदिन सुबह और शाम को करीब 2000 लोगों के लिए प्रसाद बनाया जाता है। फिर बड़े प्यार व श्राद्ध के साथ सभी को भोजन परोसा कर उन्हें खिलाया जाात है। 

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सभी को खाना खिलाकर ही मंदिर के दरवाजे होते हैं बंद 

बात मंदिर के दरवाजों को बंद करने की करें तो रात को मंदिर के द्वार बंद करने से पहले सभी से पूछा जाता है कि कोई कही भूखा तो नहीं। यह काम मंदिर के सेवादारों द्वारा किया जाता है। वे ही जोर से आवाज लगा कर पता करते हैं कि कहीं कोई भक्त भूखा तो नहीं रह गया है। साथ ही किसी द्वारा हां करने पर उसी समय उस व्यक्ति के लिए भोजन तैयार कर उसे आदर सहित दिया जाता है। उसी के बाद ही मंदिर का मेन गेट बंद करने की अनुमति है। बता दें, हर रात मंदिर का मेन गेट बंद करने से पहले यह काम किया जाता है। 

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कोरोना काल में भी नहीं टूटी परंपरा

कोरोना ने अपना कहर पूरी दुनिया में मचाकर लाखों की संख्या में लोगों को अपनी चपेट में लिया। इस दौरान सभी जगह पर लॉकडाउन होने पर भी इस मंदिर की परंपरा टूटी नहीं। यहां उसी तरह गरीबों और जरूरतमंदों के लिए भओजन पकता रहा जैसे कोरोना के आने से पहले पकता था। इस समय में भी मंदिर की रसोई बंद हुई। यहां पर खाना तैयार कर दिन- रात लोगों को बांटा गया। भगवान शिव के इस मंदिर को थप्पन और अन्नदाना प्रभु के नाम से भी जाना जाता है। 


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