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छठ पूजा में गन्ने के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है पूजा? जानें इसके पीछे का रहस्य

  • Edited By Monika,
  • Updated: 24 Oct, 2025 05:14 PM
छठ पूजा में गन्ने के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है पूजा? जानें इसके पीछे का रहस्य

नारी डेस्क : छठ पूजा भारत का एक ऐसा पर्व है जो सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के लिए समर्पित है। इस पर्व में पवित्रता, संयम और श्रद्धा का विशेष महत्व होता है। छठ पूजा के हर चरण में प्रकृति और जीवन के बीच सामंजस्य का संदेश छिपा होता है। इन्हीं प्रतीकों में से एक है गन्ना, जो इस पर्व का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।

गन्ने का धार्मिक और सांकेतिक महत्व

छठ पूजा में गन्ना पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। यह न केवल सूर्य देव को अर्पित किया जाता है, बल्कि इसे पूजा स्थल का आवश्यक अंग भी माना गया है। घर के आंगन या घाट पर गन्ने के डंठलों से छत्र या मंडपनुमा संरचना बनाई जाती है, जिसके नीचे कोसी रखी जाती है और वहीं छठी मैया की पूजा होती है। लोक मान्यता है कि गन्ने से बना यह मंडप छठी मैया को अत्यंत प्रिय होता है। ऐसा करने से मां प्रसन्न होकर घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

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गन्ना: सूर्य देव का प्रिय प्रसाद

गन्ना एक ऐसा पौधा है जिसे पशु-पक्षी जूठा नहीं करते, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। यही कारण है कि छठी मैया की पूजा में गन्ने को चढ़ाना शुभ और आवश्यक समझा जाता है। छठ पूजा में गन्ने के साथ-साथ इसका रस और गुड़ भी प्रसाद में इस्तेमाल किया जाता है, खासकर खरना के प्रसाद में। परंपरा के अनुसार, प्रसाद में चीनी का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि गन्ने से बने गुड़ से ही खीर या ठेकुआ तैयार किया जाता है।

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किसानों की समृद्धि और नई फसल का प्रतीक

गन्ना उस मौसम की प्रमुख फसल है, इसलिए यह किसानों की मेहनत और समृद्धि का प्रतीक भी है। छठ पूजा में गन्ने का उपयोग इस बात का भी द्योतक है कि हम नई फसल और प्रकृति की देन का आभार व्यक्त करें। मान्यता है कि छठ पूजा में गन्ना रखने से परिवार में खुशहाली बनी रहती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

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छठ पूजा का हर अंश मानव और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देता है। गन्ना, जो मीठास और ऊर्जा का प्रतीक है, यह सिखाता है कि जीवन में मिठास बनाए रखना ही सच्ची आराधना है। इसलिए कहा जाता है “छठ पूजा में गन्ने के बिना पूजा अधूरी, और जीवन में मिठास के बिना भक्ति अधूरी।”

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