नारी डेस्क: नवरात्रि का हर दिन अलग देवी को समर्पित होता है, लेकिन पांचवां दिन मां स्कंदमाता की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और इन्हें ममता, करुणा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक बदलाव आते हैं। कई लोग इस दिन को सिर्फ परंपरा मानते हैं, लेकिन श्रद्धा से पूजा करने वाले बताते हैं कि इससे जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।
ज्योतिष के अनुसार महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवरात्रि का पांचवां दिन चंद्र (Moon) और गुरु (Jupiter) ग्रह से जुड़ा होता है। ये दोनों ग्रह मन, ज्ञान और सुख-शांति से जुड़े होते हैं। अगर किसी की कुंडली में चंद्र कमजोर होता है, तो इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।कई परिवारों में यह मान्यता भी है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से बच्चों की पढ़ाई, करियर और स्वास्थ्य में सुधार आता है। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग इसे संतान सुख और परिवार की तरक्की से जोड़कर देखते हैं।

पूजा विधि (Puja Vidhi)
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और मां स्कंदमाता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाएं, फूल चढ़ाएं और मां का ध्यान करें। पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा से मां का स्मरण करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें और अंत में भोग लगाएं। पूजा में सबसे जरूरी चीज है सच्ची भावना और श्रद्धा।
मंत्रों का महत्व
मां स्कंदमाता की पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः’ मंत्र का जाप करने से मन शांत होता है और ध्यान केंद्रित होता है। वहीं ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः’ मंत्र का उच्चारण करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आत्मविश्वास मजबूत होता है। नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है।
कौन-सा रंग पहनें?
इस दिन पीला और सफेद रंग पहनना शुभ माना जाता है। पीला रंग गुरु ग्रह का प्रतीक है, जो ज्ञान, समृद्धि और सफलता से जुड़ा है। सफेद रंग चंद्रमा का प्रतीक है, जो मन की शांति और भावनात्मक संतुलन को दर्शाता है। इन रंगों के कपड़े पहनने से पूजा का प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
मां को क्या भोग लगाएं?
मां स्कंदमाता को हलवा, मालपुआ और दही का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा दूध से बनी मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं। ध्यान रखें कि भोग से ज्यादा जरूरी आपकी भावना होती है। अगर आप सच्चे मन से भोग लगाते हैं, तो आपको भीतर से शांति और संतोष महसूस होता है।

मां स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवां नाम तुम्हारा आता।
सबके मन की जानन हारी, जग जननी सबकी महतारी।।
तेरी जोत जलाता रहूं मैं, हरदम तुझे ध्याता रहूं मैं।
कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा।।
कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाएं तेरे भक्त प्यारे।।
भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।
इंद्र आदि देवता मिल सारे, करें पुकार तुम्हारे द्वारे।।
दुष्ट दैत्य जब चढ़कर आए, तू ही खंडा हाथ उठाए।
दासों को सदा बचाने आई, भक्त की आस पुजाने आई।।

क्या लाभ मिलते हैं?
मां स्कंदमाता की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। मान्यता है कि इससे संतान सुख, करियर में सफलता और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
जरूरी सूचना- यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और आस्था पर आधारित है। इसे अपनाने से पहले अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार निर्णय लें।