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अर्चना पूरन सिंह का आयुर्वेदिक डिटॉक्स:15 दिन में बदली लाइफस्टाइल, जानें क्या होते हैं इसके फायदे

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 26 Apr, 2026 03:36 PM
अर्चना पूरन सिंह का आयुर्वेदिक डिटॉक्स:15 दिन में बदली लाइफस्टाइल, जानें क्या होते हैं इसके फायदे

नारी डेस्क:  टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह इन दिनों अपने अनोखे आयुर्वेदिक अनुभव को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपने बेटे आर्यमान सेठी के व्लॉग में बताया कि वह 15 दिन के आयुर्वेदिक डिटॉक्स प्रोग्राम से लौटी हैं। इस दौरान उनकी पूरी दिनचर्या खाने से लेकर सोने तक पूरी तरह बदल गई। मज़ेदार अंदाज़ में उन्होंने कहा, “Live, Laugh, Eat… क्योंकि अब मैं पहले जैसा खा नहीं सकती।

15 दिन का आयुर्वेदिक वेलनेस प्रोग्राम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्चना बेंगलुरु में एक आयुर्वेदिक वेलनेस प्रोग्राम में शामिल हुई थीं। इन 15 दिनों में उन्होंने सख्त नियमों का पालन किया। न सिर्फ उनका खानपान बदला, बल्कि सोने-जागने का समय भी पूरी तरह से अनुशासित रहा। इस अनुभव को उन्होंने चुनौतीपूर्ण जरूर बताया, लेकिन साथ ही इसे बेहद फायदेमंद भी माना।

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डाइट में क्या-क्या बदला

इस डिटॉक्स के दौरान अर्चना ने मीठा, मैदा और तला-भुना खाना पूरी तरह छोड़ दिया। उनकी डाइट में हल्की और आसानी से पचने वाली सब्जियां शामिल थीं, जैसे तोरई, चिचिंडा, लौकी और परवल। ये सब्जियां शरीर को अंदर से साफ करने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।

हल्की सब्जियां क्यों होती हैं फायदेमंद

आयुर्वेदिक नजरिए से Cucurbitaceae फैमिली की सब्जियां शरीर के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ये सब्जियां पेट को हल्का रखती हैं, गैस और ब्लोटिंग से बचाती हैं और शरीर को हाइड्रेटेड बनाए रखती हैं। साथ ही, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करती हैं।

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मीठा, मैदा और फ्राइड फूड से दूरी क्यों जरूरी

डॉक्टरों के मुताबिक, ज्यादा मीठा और रिफाइंड फूड शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने और फैट जमा होने का खतरा रहता है। वहीं मैदा और तले-भुने खाद्य पदार्थों में पोषण की कमी होती है, जो धीरे-धीरे कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

रात 7 बजे डिनर, 10 बजे सोना क्या है इसका साइंस

अर्चना के डिटॉक्स रूटीन में एक अहम नियम था शाम 7 बजे तक डिनर और रात 10 बजे तक सो जाना। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर की सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) सूरज के हिसाब से काम करती है। जल्दी सोने और समय पर खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को पूरा आराम मिलता है। इससे मेटाबॉलिज्म और हार्मोन बैलेंस भी सुधरता है।

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दिमाग और आदतों पर असर

आज की लाइफस्टाइल में जंक फूड और अनियमित दिनचर्या आम हो चुकी है। ऐसे में अचानक आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाना आसान नहीं होता। विशेषज्ञ मानते हैं कि धीरे-धीरे छोटे बदलाव करना ज्यादा प्रभावी होता है। इससे शरीर के साथ-साथ दिमाग भी नई आदतों को आसानी से स्वीकार कर पाता है।

 

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