नारी डेस्क: हाल ही में एक्ट्रेस आकांक्षा रंजन कपूर ने अपने एग फ्रीजिंग के अनुभव को लेकर खुलकर बात की, जिसके बाद यह प्रोसेस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने करियर और पर्सनल प्लानिंग को ध्यान में रखते हुए लिया था, लेकिन इसका अनुभव उतना आसान नहीं रहा जितना अक्सर समझा जाता है।
क्या होता है एग फ्रीजिंग?
स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, एग फ्रीजिंग या ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें महिलाओं के अंडों को भविष्य में गर्भधारण के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यह उन महिलाओं के लिए विकल्प माना जाता है जो अभी मां नहीं बनना चाहतीं लेकिन भविष्य में इस संभावना को सुरक्षित रखना चाहती हैं।

पहला Step मेडिकल जांच और प्लानिंग
इस प्रक्रिया की शुरुआत डॉक्टर से परामर्श से होती है। इसमें महिला की मेडिकल हिस्ट्री, पीरियड साइकिल और ओवेरियन रिजर्व की जांच की जाती है। अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के जरिए यह समझा जाता है कि अंडाशय में कितने हेल्दी एग्स मौजूद हैं, जिसके आधार पर आगे की योजना बनाई जाती है।
दूसरा Step हार्मोनल स्टिमुलेशन
इसके बाद लगभग 10 से 12 दिनों तक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि ओवरी में एक साथ ज्यादा एग्स विकसित हो सकें। इस दौरान लगातार ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं ताकि एग्स की ग्रोथ पर नजर रखी जा सके।
तीसरा Step एग्स का संग्रह और फ्रीजिंग
जब एग्स पूरी तरह विकसित हो जाते हैं, तो उन्हें एक छोटी प्रक्रिया के जरिए निकाला जाता है। इसके बाद सिर्फ स्वस्थ एग्स को चुना जाता है और उन्हें विट्रीफिकेशन तकनीक से तुरंत फ्रीज कर दिया जाता है, जिससे उनकी क्वालिटी सुरक्षित रहती है। इन्हें बेहद कम तापमान पर स्टोर किया जाता है।

चौथा Step भविष्य में उपयोग
जब महिला प्रेग्नेंसी के लिए तैयार होती है, तब इन एग्स को डीफ्रॉस्ट करके स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। इसके बाद बने भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है, जिससे गर्भधारण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
कितना मुश्किल होता है यह प्रोसेस?
डॉक्टरों के मुताबिक यह प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हार्मोनल बदलाव के कारण पेट फूलना, मूड स्विंग्स, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं आम हैं। कुछ महिलाओं को ओवरी के आकार बढ़ने के कारण चलने-फिरने में भी असुविधा महसूस होती है।
इमोशनल और मानसिक असर भी अहम
सिर्फ शारीरिक ही नहीं, यह प्रक्रिया मानसिक रूप से भी थका देने वाली हो सकती है। हार्मोनल बदलावों के कारण तनाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलते हैं, जो हर महिला में अलग-अलग स्तर पर महसूस होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एग फ्रीजिंग से गर्भधारण की गारंटी नहीं मिलती। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि महिला की उम्र, एग्स की क्वालिटी और उसकी फर्टिलिटी कैसी है। आमतौर पर कम उम्र में फ्रीज किए गए एग्स से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है।

एक सोच-समझकर लिया जाने वाला फैसला
एग फ्रीजिंग आज के समय में महिलाओं के लिए एक विकल्प जरूर है, लेकिन यह एक जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया भी है। इसलिए इसे अपनाने से पहले पूरी जानकारी और डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी माना जाता है।