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इस देश में टॉयलेट सीट की पूजा करते हैं लोग!

  • Edited By Monika,
  • Updated: 28 Mar, 2026 02:15 PM
इस देश में टॉयलेट सीट की पूजा करते हैं लोग!

नारी डेस्क : दुनिया भर में कई ऐसी परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिन्हें सुनकर पहली बार में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक अनोखी और हैरान कर देने वाली परंपरा चीन में देखने को मिलती है, जहां टॉयलेट सीट की पूजा की जाती थी। यह परंपरा किसी मज़ाक या अंधविश्वास भर नहीं, बल्कि एक दुखद और भावुक लोककथा से जुड़ी हुई है।

कहां प्रचलित है यह परंपरा?

यह परंपरा चीन में “जिगू देवी” (Zigu) के नाम से जानी जाती है। कुछ लोग उन्हें “टॉयलेट देवी” या “कमोड की रानी” भी कहते हैं। मान्यता के अनुसार, जिगू देवी महिलाओं की रक्षक हैं, खासकर उन स्त्रियों की जो जीवन में अन्याय और दुख सहती हैं। यह पूजा खासतौर पर लैंटर्न फेस्टिवल के दिन की जाती है, जो चीनी चंद्र कैलेंडर के पहले महीने के 15वें दिन आता है।

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जिगू देवी की दुखद लोककथा

जिगू देवी की कहानी बेहद भावुक और दर्दभरी है। कहा जाता है कि वह एक सुंदर महिला थीं, जो एक अमीर व्यक्ति की रखैल (concubine) थीं। उस व्यक्ति की पत्नी उनसे बेहद जलती थी। ईर्ष्या और क्रोध में आकर उसने जिगू की हत्या कर दी, हत्या के बाद उनका शव टॉयलेट में फेंक दिया गया। इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों का मानना है कि उनकी आत्मा वहीं बस गई। धीरे-धीरे उन्हें एक देवी का रूप दे दिया गया और उनकी पूजा शुरू हो गई।

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कैसे की जाती है पूजा?

जिगू देवी की पूजा का तरीका भी काफी अनोखा है। लोग टॉयलेट या उससे जुड़े स्थान को साफ करते हैं। वहां दीपक या अगरबत्ती जलाते हैं। हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं। महिलाएं खासतौर पर अपनी समस्याओं के समाधान की कामना करती हैं। कुछ लोग भविष्य जानने के लिए भी उनसे प्रार्थना करते हैं।

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क्यों की जाती है यह पूजा?

इस परंपरा के पीछे कई भावनात्मक और सामाजिक कारण माने जाते हैं। महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की भावना, दुख सहने वाली स्त्रियों को श्रद्धांजलि और जीवन की समस्याओं से मुक्ति की कामना। 

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आज के समय में स्थिति

आधुनिक चीन में यह परंपरा काफी हद तक कम हो चुकी है। हालांकि, कुछ ग्रामीण इलाकों और पारंपरिक मान्यताओं में आज भी जिगू देवी की पूजा की जाती है।
 

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