नारी डेस्क: हाल ही में जोमैटो के CEO दीपेंद्र गोयल एक इंटरव्यू के दौरान चर्चा में आ गए, जब लोगों ने उनके सिर के पास लगा एक छोटा सा डिवाइस देखा। यह डिवाइस उनके कान के ऊपर, टेंपल एरिया में लगा हुआ था। इसे देखकर सोशल मीडिया पर लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर यह डिवाइस क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।
क्या है यह हाई-टेक डिवाइस?
दीपेंद्र गोयल ने जो डिवाइस पहना था, वह ब्रेन-स्टिमुलेशन या न्यूरो-स्टिमुलेशन डिवाइस है। इसे मेडिकल भाषा में tDCS (Transcranial Direct Current Stimulation) कहा जाता है। यह एक तरह का न्यूरो-वियरेबल डिवाइस है, जिसका इस्तेमाल दिमाग की गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। यह कोई हियरिंग एड नहीं है, बल्कि ऐसा डिवाइस है जो दिमाग को हल्के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स के जरिए स्टिम्युलेट करता है, जिससे मेंटल परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है।
न्यूरो-स्टिमुलेशन डिवाइस कैसे काम करता है?
यह डिवाइस सिर की त्वचा के जरिए दिमाग तक बहुत हल्की इलेक्ट्रिक करंट वेव्स भेजता है। ये वेव्स दिमाग की कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स की एक्टिविटी को बैलेंस करने में मदद करती हैं। हालांकि इसमें करंट का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसकी मात्रा इतनी कम होती है कि इससे किसी तरह का दर्द नहीं होता। इसे पहनने पर व्यक्ति को बस हल्की झुनझुनी महसूस हो सकती है। यह डिवाइस आरामदायक होता है और रोजमर्रा के काम करते समय भी पहना जा सकता है।
इस डिवाइस के संभावित फायदे
ब्रेन-स्टिमुलेशन डिवाइस के इस्तेमाल से कई तरह के फायदे बताए जाते हैं, जैसे
मेंटल फोकस और एकाग्रता में सुधार
तनाव और मानसिक थकान कम होना
नींद की गुणवत्ता बेहतर होना
दिमाग की परफॉर्मेंस और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ना इसी वजह से कई बिजनेसमैन, प्रोफेशनल्स और हाई-परफॉर्मेंस जॉब्स करने वाले लोग इस तरह की तकनीक में रुचि दिखा रहे हैं।
इस्तेमाल से पहले सावधानी जरूरी
हालांकि यह डिवाइस फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति का दिमाग और शरीर अलग होता है, इसलिए सही गाइडेंस के बिना इसका उपयोग नुकसानदायक भी हो सकता है।
जोमैटो CEO दीपेंद्र गोयल द्वारा पहना गया यह हाई-टेक न्यूरो-स्टिमुलेशन डिवाइस आज के दौर में मेंटल फिटनेस और फोकस बढ़ाने की नई तकनीक को दर्शाता है। हालांकि इसे बिजनेस माइंड का सीक्रेट कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि आने वाले समय में ऐसी टेक्नोलॉजी मेंटल हेल्थ और परफॉर्मेंस के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।