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रक्त बेचने पर इस महिला ने उठाई थी आवाज, गरीबों की मदद के लिए शुरू किया अभियान

  • Edited By Priya dhir,
  • Updated: 02 Oct, 2020 05:20 PM
रक्त बेचने पर इस महिला ने उठाई थी आवाज, गरीबों की मदद के लिए शुरू किया अभियान

समय के साथ-साथ लोग काफी जागरूक हो रहे हैं। पहले लोग रक्तदान करने से कतराते थे लेकिन अब लोग इसके लिए खुद आगे आते है। पिछले 5 दशकों से 91 वर्षीय कांता स्वरुप कृष्ण रक्तदान करने के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। वह लोगों को ब्लड डोनेशन कैंप लगाने की अपील करती हैं ताकि गरीब लोगों को फ्री में रक्त मिल सकें और रक्त के कारण किसी की जान ना जाएं।  सोशल वर्कर और ब्लड बैंक सोसाइटी की फाउंडर कांता स्वरुप कृष्ण ने देश में रक्त बेचने और खरीदने पर रोक लगाने के लिए एक कैंपन शुरू किया, जिसके तहत ब्लड डोनेशन कैंप लगाए। 

साल 1964 में ब्लड डोनेशन अभियान में हुई शामिल 

कांता स्वरुप साल 1956 में अपने पति और बच्चों के साथ अंबाला से चंडीगढ़ गई थी। उन्होंने बताया था कि साल 1964 को डॉ. जेजी जोली उनके घर आए जो उस वक्त (PGI Blood Bank) के इनचार्ज थे। उन्होंने मुझे कहा कि आजकल रक्त बेचने और खरीदने का बिजनेस चल रहा है जिससे हजारों लोगों की जान जा रही है। तब उन्होंने मुझे ब्लड डोनेशन अभियान चलाने को कहा। इसके बाद कांता स्वरुप इस अभियान का हिस्सा बनी। 

1971 में डीएवी कॉलेज में लेक्चर देने पहुंची थीं कांता स्वरूप

साल 1971 में भारत-पाक युद्ध चल रहा था। इस दौरान युद्ध में घायल अनेक सैनिक चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में भर्ती थे। उस वक्त रक्त की बहुत जरूरत थी। उस समय पीजीआई ब्लड बैंक की सचिव रहीं कांता स्वरूप कृष्णा रक्तदान के लिए प्रेरित करने के लिए डीएवी कॉलेज पहुंची थीं। जहां उन्होंने रक्तदान को लेकर लेक्चर दिया था। उनसे प्रभावित होकर कई लोगों ने उस वक्त रक्तदान किया था। 

कई अवॉर्ड्स से सम्मानित

बता दें कि रक्तदान के लिए समाज में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ही कांता स्वरूप को पद्मश्री से नवाजा गया। इसके अलावा  उन्हें राजीव गांधी अवॉर्ड, मदर टेरेसा आदि अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। आपको बता दें कि कांता स्वरुप की बेटी निति अब अपनी मां की जगह ब्लड बैक की देखरेख कर रही है। 

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