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कम बजट में ज्यादा मस्ती करने के लिए जरूर जाएं लद्दाख

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 17 Sep, 2018 12:59 PM
कम बजट में ज्यादा मस्ती करने के लिए जरूर जाएं लद्दाख

क्या आप भी कम बजट में ज्यागा मस्ती करने वाली डेस्टीनेशन तलाश रहे हैं? परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको भारत की एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी इस ट्रैवलिंग लिस्ट में परफेक्ट बैठती है। हम बात कर रहे हैं भारत के ठंडे और खूबसूरत शहर लेह लद्दाख की। सर्द मौसम, बर्फ से ढके पहाड़, सुंदर झीलें और शांत वातावरण के लद्दाख किसी जन्नत से कम नहीं लगता। आइए जानते हैं ट्रैवलिंग के लिए क्यों बेस्ट है लद्दाख।

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क्यों जाए लेह लद्दाख
बर्फीली घाटियों से ढंके पहाड़ और कल-कल बहते ठंडे पहाड़ी झरने वाला लेह लद्दाख किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हरियाली चुनर, भूरे-बंजर पत्थरों से पटी विशाल पर्वत श्रृंखलाएं, हजारों फीट की ऊंचाई वाले पर्वतों के बीच बेहद खूबसूरत घाटियां, दोनों तरह की नदियां, किसी रेगिस्तान की तरह बिछी रेत, खूबसूरत झील, ये सब नज़ारे आपको लद्दाख में आसानी से देखने को मिल जाएंगे। इन सबके अलावा यहां पर बने हुए पांगोंग लेक, शांति स्तूप, लेह प्लेस, नुब्रा वैली, मैग्नेटिक हिल भी बेहद खुबसूरत है।

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कम होती है भीड़
सितंबर के महीने से ही लद्दाख में ठंड शुरू हो जाती है, जिसके कारण यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। इस महीने में आपको यहां रिजार्ट से लेकर गाड़ियों तक सुविधा आराम से मिल जाएगी। इसके अलावा इस मौसम में यहां पेन्‍गॉन्‍ग झील के पास शांति से बैठने सबसे ज्‍यादा मजा आता है।

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सस्ते में लें होटल
सितंबर से नवंबर के महीने में यहां पर्यटकों की भीड़ लगी है, जिसके कारण होटलों के किराए सस्ते कर दिए जाते हैं। इतना ही नहीं, यहां कुछ ऐसे खास होटल्स भी हैं जो ऑफ सीजन से लेकर ऑन सीजन में खुले रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सितंबर महीने में कुछ होटल्‍स 50 फीसदी तक डिस्‍काउंट देते हैं।

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लद्दाख फेस्टिवल
सितंबर महीने में आप यहां लद्दाख का खास फेस्टिवल सेलिब्रेशन भी देख सकते हैं। सितंबर के महीने में नरोपा त्‍योहार मनाया जाता है, जिसे लद्दाख का कुंभ भी कहा जा सकता है। इसके अलावा भी सितंबर में यहां बहुत से त्यौहार सेलिब्रेट किए जाते हैं।

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तुर्तुक घाटी
लेह लद्दाख से लगभग 211 कि.मी की दूरी पर बसा तुर्तुक बेहद खूबसूरत गांव है। इस गांव के लोग लद्दाखी, बालती, और उर्दू बोलते हैं। इसे भारत की आखिरी चौंकी और सियाचिन ग्लेशियर का गेटवे भी कहा जाता है।

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पनामिक कुंड
फूलों की घाटी के साथ-साथ इस जगहें को गर्म पानी के कुंड से भी जाना जाता है। इस कुंड़ के पानी में बुलबुले निकलते हुए देख सकते है।

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