
नारी डेस्क: महाशिवरात्रि 2026 इस बार 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पावन दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, चार प्रहर में शिव पूजा करते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और रात्रि जागरण कर महादेव का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हालांकि, कोई भी व्रत रखने से पहले उसके नियम और अपनी शारीरिक स्थिति को समझना बहुत जरूरी होता है। महाशिवरात्रि का व्रत भी हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता। आइए जानते हैं किन लोगों को यह व्रत नहीं रखना चाहिए या विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। ऐसे में कठिन और निर्जला व्रत उनके स्वास्थ्य और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर वे व्रत रखना चाहें, तो पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। चाहें तो कठिन व्रत की जगह फलाहार या बिना नमक वाला हल्का भोजन कर सकती हैं।

गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग
जिन लोगों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, किडनी की समस्या या कोई अन्य गंभीर बीमारी है, उन्हें महाशिवरात्रि का व्रत रखने से बचना चाहिए। व्रत के कारण दवा, भोजन और पानी में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
बुजुर्गों को भी बिना डॉक्टर की सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए।
मासिक धर्म के दौरान महिलाएं
मासिक धर्म के समय महिलाएं शिवलिंग का स्पर्श करके पूजा नहीं करतीं, लेकिन वे चाहें तो व्रत रख सकती हैं। इस दौरान वे मानसिक जप, ध्यान और भगवान शिव का स्मरण कर सकती हैं।

व्रत न रख पाने पर क्या करें?
शास्त्रों में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य या विषम परिस्थितियों के कारण व्रत नहीं रख सकता, तो केवल व्रत ही जरूरी नहीं है। ऐसे लोग शिव पूजा, मंत्र जाप, दान-पुण्य और सात्विक भोजन के माध्यम से भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। महाशिवरात्रि का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन इसे अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही रखना चाहिए। भगवान शिव भक्ति और भावना से प्रसन्न होते हैं, केवल उपवास से नहीं।