नारी डेस्क: आजकल बच्चे स्मार्टफोन और इंटरनेट पर बहुत समय बिताते हैं। लेकिन सोशल मीडिया, चैटबॉट्स और एआई एप्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण उन्हें अनचाहे अश्लील या सेंसिटिव कंटेंट का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में अमेरिका में 14 साल के एक बच्चे ने लंबे समय तक एआई चैटबॉट से बातचीत करने के बाद आत्महत्या कर ली, जो इस खतरे को और बढ़ा देता है। ऐसे में पैरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और नियंत्रित बनाएं।
क्यों जरूरी है निगरानी?
सोशल मीडिया और एआई के बढ़ते इस्तेमाल से फेक न्यूज, डीपफेक और अश्लील कंटेंट का खतरा बढ़ा है। बच्चे अक्सर बिना समझे चैटबॉट्स या सोशल प्लेटफॉर्म्स पर चैट करते हैं। माता-पिता सिर्फ कंटेंट ही नहीं, बल्कि बच्चों की डिजिटल एक्टिविटी पर नजर रखना चाहते हैं।
बच्चों के फोन में मॉनिटरिंग के लिए एप्स
Watcher एप जैसे टूल से
बच्चे के फोन की नोटिफिकेशन देखी जा सकती हैं। लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं। कौन-सा एप कितनी देर चला, यह पता लगाया जा सकता है। बच्चों के फोन में 5 जरूरी सेटिंग्स और टूल्स
चैटजीपीटी (ChatGPT) – फैमिली अकाउंट से नियंत्रण
चैटजीपीटी में पैरेंट्स फैमिली अकाउंट जोड़कर बच्चों की चैट्स और कंटेंट पर नजर रख सकते हैं। सेटिंग्स → पैरेंटल कंट्रोल → एड फैमिली मेंबर → बच्चे का ईमेल जोड़ें → रिक्वेस्ट अप्रूव करें। इसके बाद पैरेंट्स बच्चों की चैट्स और एक्सेस सीमित कर सकते हैं।
गूगल जेमिनी (Google Gemini) – फैमिली लिंक से निगरानी
प्ले स्टोर से फैमिली लिंक एप डाउनलोड करें। बच्चे का जीमेल अकाउंट जोड़ें और पैरेंट अकाउंट से कंट्रोल एक्टिवेट करें। जेमिनी ऑप्शन में जाकर बच्चों की पहुंच और कंटेंट को सीमित करें।
यूट्यूब – बच्चों के लिए सेटिंग्स
बच्चों का अलग गूगल अकाउंट हो तो फैमिली लिंक से यूट्यूब की पहुंच सीमित करें। सर्च और रिकमेंडेशन कंट्रोल ऑन करें। 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए डिवाइस पर अलग अकाउंट बनाएं। प्रोफाइल → सेटिंग्स → फैमिली सेंटर → बच्चों के लिए अकाउंट जोड़ें।
इंस्टाग्राम / मेटा – सुपरविजन मोड
इंस्टाग्राम में सुपरविजन मोड से एआई कंटेंट और चैट पर नियंत्रण किया जा सकता है। प्रोफाइल → मेन्यू → सुपरविजन फॉर टोन्स → बच्चे की रिक्वेस्ट अप्रूव करें। इससे पैरेंट्स एआई चैट्स ब्लॉक कर सकते हैं, कीवर्ड रोक सकते हैं और इस्तेमाल का समय तय कर सकते हैं।

एआई बेस्ड पैरेंटल कंट्रोल एप्स
Net Nanny – वेबसाइट्स, सोशल मीडिया और चैट्स फिल्टर करता है।
Canopy – तस्वीर और टेक्स्ट में आपत्तिजनक कंटेंट ब्लॉक करता है।
Qustodio – स्क्रीन टाइम, एप यूज और ब्राउजिंग हिस्ट्री पर नजर रखता है।
ये एप्स बैकग्राउंड में चलते हैं, सेंसिटिव कंटेंट छुपाते हैं और पैरेंट्स को रिपोर्ट भेजते हैं। सभी गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं।
बच्चों के लिए एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सेफ स्पेस बनाना आज के समय में बेहद जरूरी है। फोन मॉनिटरिंग एप्स और पैरेंटल कंट्रोल से अश्लील और सेंसिटिव कंटेंट रोका जा सकता है। बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखना उन्हें सुरक्षित और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है।