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कहीं मटन बिरयानी तो कहीं मछली...इन मंदिरों को चढ़ाया जाता है भगवान को Non-Veg का भोग

  • Edited By Charanjeet Kaur,
  • Updated: 20 Apr, 2024 05:30 PM
कहीं मटन बिरयानी तो कहीं मछली...इन मंदिरों को चढ़ाया जाता है भगवान को Non-Veg का भोग

वैसे तो मंदिर को बेहद ही पवित्र स्थान के रूप में देखा जाता है। यहां जाने से पहले कई लोग नॉनवेज तो दूर प्याज- लहसुन तक नहीं खाते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में ऐसे कई सारे मंदिर हैं जहां नॉनवेज का भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। चलिए आपको बताते हैं इन मंदिरों के बारे में...

 

मुनियांदी स्वामी मंदिर

तमिलनाडु के मुनियांदी स्वामी मंदिर में चिकन और मटन बिरयानी प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

बिमला देवी मंदिर

ओडिशा के पुरी में स्थित बिमला देवी मंदिर में मटन और मछली से बना प्रसाद मिलता है। दुर्गा पूजा के दौरान विमला देवी मंदिर में बकरी की बलि दी जाती है और मछली का भोग भी लगाया जाता है।

 

 

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परासिनिक करवु मंदिर

वहीं केरल के परासिनिक करवु मंदिर में मछली और ताड़ी चढ़ाई जाती है।

तरकुलहा देवी मंदिर

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में तरकुलहा देवी मंदिर में बकरे का मांस प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है। यहां हर साल खिचड़ी का मेला होता है। इस दौरान यहां देवी को बकरे की बलि दी जाती है। इसके बाद उसके मांस को मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है।

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कामाख्या देवी मंदिर

असम के कामाख्या देवी मंदिर में मछली और मीट का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे वो प्रसन्न होती हैं।

कालीघाट मंदिर

पश्चिम बंगाल के मशहूर कालीघाट मंदिर में बकरे के मांस का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

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