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फरीदा जलाल ने बताया बचपन का दर्द... मां-बाप के तलाक के बाद कोर्ट ने भेजा दिया था बोर्डिंग स्कूल

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 15 Mar, 2026 02:18 PM
फरीदा जलाल ने बताया बचपन का दर्द... मां-बाप के तलाक के बाद कोर्ट ने भेजा दिया था बोर्डिंग स्कूल

नारी डेस्क:   दिग्गज अभिनेत्री Farida Jalal की पर्सनल लाइफ पर्दे पर उनके किरदारों जितनी चमकदार नहीं रही, बल्कि काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। उन्होंने अपने बचपन और करियर के बारे में कई बार खुलकर बातचीत की है। हाल ही में अपने जीवन के निजी पहलुओं जैसे माता-पिता का तलाक, बोर्डिंग स्कूल का अनुभव और धर्म के प्रति अपने दृष्टिकोण के बारे में उन्होंने साझा किया।

बचपन में माता-पिता का तलाक और बोर्डिंग स्कूल

फरीदा जलाल ने बताया कि जब वह सिर्फ दो साल की थीं, उनके माता-पिता का तलाक हो गया था। तलाक के बाद अदालत ने आदेश दिया कि बच्चों को बोर्डिंग स्कूल भेजा जाए, हालांकि अंततः उनकी मां को बच्चों की कस्टडी मिल गई। बोर्डिंग स्कूल में बड़े होने का अनुभव फरीदा के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने याद किया कि कैसे अलग होने और घर से दूर पढ़ाई करने के अनुभव ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला।

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फरीदा जलाल का असली नाम और शिक्षा

अभिनेत्री ने बताया कि उनका असली नाम फरीदा सामी है। उन्होंने मिशनरी स्कूल में पढ़ाई की, जहां से उनका अभिनय का शौक जग गया। स्कूल के दौरान वह अक्सर भारतीय नृत्य प्रस्तुतियों में भाग लिया करती थीं, और हर प्रोग्राम में उनका नाम “फरीदा सामी” के साथ जुड़ा रहता था। फरीदा के अनुसार, यही मंचन और नृत्य का अनुभव उन्हें आगे जाकर फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने में मददगार साबित हुआ।

भाषाई ऑफर और फिल्मों का चुनाव

फरीदा जलाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें भोजपुरी, पंजाबी और गुजराती फिल्मों के ऑफर भी आए, लेकिन उन्होंने इन फिल्मों में काम करने से मना किया। उनका कहना था कि अगर अभिनेता किसी भाषा से सहज नहीं होता, तो डायलॉग और भाव सही तरीके से नहीं निकलते, और यह कैमरे पर झलक जाता है। फरीदा ने स्पष्ट किया कि वह भाषा न आने की वजह से पूरी आत्मविश्वास के साथ अभिनय नहीं कर पाएंगी, इसलिए उन्होंने मना कर दिया।

रिटायरमेंट का ख्याल नहीं

फरीदा जलाल ने यह भी कहा कि वह अभी रिटायरमेंट का सोचती नहीं हैं। उनका मानना है कि शारीरिक रूप से फिट रहना जरूरी है, लेकिन सेट पर वह ऊर्जा से भरी रहती हैं। उनका कहना है, “जब मैं सेट पर होती हूं, तो पूरी तरह एक्टिव और प्रेरित महसूस करती हूं, इसलिए मैं अभी भी काम जारी रखना चाहती हूं।”

शॉर्ट फिल्म 'मेहरम' का अनुभव

फरीदा ने अपनी शॉर्ट फिल्म 'मेहरम' के बारे में भी बताया। यह फिल्म एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला की कहानी है, जो हज पर जाने के लिए उत्सुक है लेकिन कई बाधाओं का सामना करती है। फरीदा ने कहा कि उन्हें कहानी बहुत पसंद आई और इस फिल्म में एक मूल संदेश और भावनात्मक गहराई है। उन्होंने जो भी भूमिका निभाई, वह अपने धर्म की शिक्षाओं के खिलाफ कभी नहीं गईं, चाहे पर्दे पर किरदार कितना भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो।

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धर्म के प्रति दृढ़ता

फरीदा जलाल का कहना है कि वह कभी भी अपने धर्म की शिक्षाओं के खिलाफ नहीं जाएंगी। उनका मानना है कि पर्दे पर निभाए गए किरदारों के लिए भी धर्म और नैतिक मूल्यों का पालन करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से तय नियमों को तोड़ना या मरोड़ना सही नहीं है, क्योंकि इसके पीछे कारण और परंपरा होती है।

लंबे करियर में 200 से अधिक फिल्में

लगभग पांच दशकों के करियर में, फरीदा जलाल ने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया और भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और सम्मानित अभिनेत्रियों में से एक बन गईं।

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उनकी कुछ यादगार फिल्मों में शामिल हैं

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, राजा हिंदुस्तानी, कुछ कुछ होता है, कहो ना… प्यार है, दिल तो पागल है कभी खुशी कभी गम उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय क्षमता उन्हें दर्शकों के बीच हमेशा यादगार बनाती रही है। फरीदा जलाल की कहानी हमें यह दिखाती है कि बचपन की कठिनाइयों, तलाक और बोर्डिंग स्कूल के अनुभवों के बावजूद, दृढ़ इच्छाशक्ति और जुनून से किसी भी मुश्किल परिस्थिति को पार किया जा सकता है। उन्होंने अपने धर्म, व्यक्तिगत मूल्यों और अभिनय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को हमेशा प्राथमिकता दी है

  

 

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