नारी डेस्क: छठ पूजा भारत का एक प्राचीन और पवित्र पर्व है जो सूर्य देव (Lord Surya) और छठी मैया (Chhathi Maiya) को समर्पित होता है। यह पर्व प्रकृति, जल, सूर्य और जीवन के संतुलन का प्रतीक है। मान्यता है कि सूर्य देव जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य के दाता हैं और छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं।
छठ पूजा क्यों की जाती है
सूर्य देव की उपासना के लिए: सूर्य को जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। छठ पूजा में अस्त होते और उगते सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है ताकि जीवन में संतुलन बना रहे।
छठी मैया को धन्यवाद देने के लिए: मान्यता है कि छठी मैया बच्चों की रक्षा करती हैं और उन्हें लंबी आयु देती हैं। महिलाएं अपनी संतान की सुरक्षा और परिवार के सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।
शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए: यह व्रत शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त करता है और मन को शांत करता है। निर्जला उपवास और ध्यान के माध्यम से आत्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
कृषि और जल के प्रति आभार: सूर्य और जल दोनों ही खेती के लिए आवश्यक हैं। छठ पूजा इन प्राकृतिक तत्वों के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।

छठ पूजा का धार्मिक महत्व (Significance)
यह पर्व सूर्य उपासना की सबसे प्राचीन परंपरा है, जिसका उल्लेख वेदों में भी मिलता है। कहा जाता है कि माता सीता और भगवान राम ने अयोध्या लौटने के बाद छठी मैया की पूजा की थी। छठ व्रत से काया, मन और आत्मा तीनों की शुद्धि होती है। यह व्रत पूर्ण निष्ठा, सत्य और संयम के साथ किया जाता है, जिसमें झूठ, क्रोध या किसी तरह की अशुद्धि नहीं रखी जाती।
छठ पूजा व्रत की विधि (Vrat Vidhi)
पहला दिन – नहाय खाय (Nahay Khay) सुबह स्नान कर घर की सफाई की जाती है। व्रती दिनभर व्रत रखकर एक बार भोजन करता है लौकी-भात और चने की दाल। भोजन पूर्णत सात्विक और बिना लहसुन-प्याज का होता है।
दूसरा दिन – खरना (Kharna)
दिनभर निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी और केला का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। व्रती प्रसाद खाकर अगला निर्जला व्रत शुरू करता है।
तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)
व्रती पूरा दिन बिना जल और अन्न के व्रत रखता है। शाम को नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। ठेकुआ, फल, नारियल, दीपक और पूजा की सामग्री अर्पित की जाती है।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य (Usha Arghya)
सुबह सूर्योदय से पहले घाट पर जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य के बाद छठी मैया से आशीर्वाद लेकर व्रत का समापन किया जाता है।
घर लौटकर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। व्रत के दौरान सावधानियां
पूरे व्रत के दौरान पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखें। प्लास्टिक या कृत्रिम वस्तुएं पूजा में न रखें। प्रसाद बनाते समय नमक और लहसुन-प्याज का प्रयोग न करें। व्रती के आसपास शोर-शराबा न करें।
छठ पूजा केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि प्रकृति, जल और सूर्य के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का उत्सव है। यह व्रत जीवन में संतान-सुख, समृद्धि और मानसिक शांति लाने वाला माना जाता है। जो भी व्यक्ति पूर्ण आस्था और स्वच्छता के साथ छठी मैया की पूजा करता है, उसके घर में सुख और सकारात्मकता का वास होता है।