अनार प्रकृति प्रदत्त एक उत्तम फल है । इसका वैज्ञानिक नाम प्यूनिका ग्रेनेटम है। अनार के फल लाल रंग के और अत्यंत ही आकर्षक होते हैं । इसके पेड़ में गर्मी के मौसम में फूल और बरसात के अंत में फल आते हैं । आयुर्वेद के अनुसार मीठा अनार कफ-वात-पित्त नाशक, तृप्तिदायक, बलवर्धक, हल्का, स्निग्ध, मेधा और बुद्धि को शक्ति देने वाला, प्यास, बुखार, हृदय व्याधि, कुष्ठ और कंठ व्याधि तथा मुंह की दुर्गंध का शमन करने वाला होता है । खट्टा-मीठा अनार अग्रि प्रदीप्त करने वाला, जायकेदार, तनिक पित्त बढ़ाने वाला एवं हल्का होता है । खट्टा अनार पित्त कुपित करने वाला और कफ समाप्त करने वाला होता है । अनार के प्रमुख औषधीय गुण निम्रलिखित हैं :
- यदि ऐेंठन लिए हुए दस्त आएं, तो अनार की 1 कली, तुलसी के पत्ते और काली मिर्च की ठंडाई की तरह पीस कर सेवन करना लाभप्रद है ।
- खूनी दस्त (पेचिश) में गन्ने के रस में समान मात्रा में अनार का रस मिलाकर 100 से 200 मि.ली. की मात्रा में पीने से पूरा लाभ मिलता है ।
- शरीर में खून की कमी (एनीमिया) होने पर अनार का सेवन हितकारी है ।
- अनार की पत्तियां छाया में सुखा कर चूर्ण बनाकर मंजन की तरह प्रयोग करने से दांत स्वच्छ और मजबूत होते हैं तथा दांतों से खून आना भी बंद हो जाता है ।
- अनार की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से दांत मजबूत होते हैं ।
- अनार के ताजे पत्ते 250 मि.ली. पानी में घोट कर छान लें । सुबह-शाम नियमित रूप से इस पानी का सेवन करने से हृदय की अनियमित धड़कन सामान्य हो जाती है ।
- अनार के छिलकों को थोड़ी-सी मात्रा में पानी में उबालकर उससे कुल्ला करने से मुख की दुर्गंध दूर होती है ।
- अनार के पत्ते पानी में पीसकर टिकिया बनाकर रात में आंख पर रख कर बांधने से जलन में लाभ मिलता है।
- पित्ती होने पर अनार के फूलों का रस मिश्री मिलाकर पीना हितकारी है।
- बच्चों को उल्टी होने लगे तो 1 छोटा चम्मच अनार का रस पिलाने से उल्टी बंद हो जाती है ।