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IWD2021: कैसे हुई महिला दिवस मनाने की शुरूआत, जानिए इस साल की थीम क्यों खास?

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 08 Mar, 2021 11:22 AM
IWD2021: कैसे हुई महिला दिवस मनाने की शुरूआत, जानिए इस साल की थीम क्यों खास?

8 मार्च यानि कल दुनियाभर में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस (International Womens Day) सेलिब्रेट किया जाएगा। असल में इस दिन को मनाने का मकसद सिर्फ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। भले ही महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हो लेकिन कुछ जगहों पर आज भी औरतों को राजनैतिक तो दूर मौलिक अधिकार से भी वंचित रखा है। दुनिया के हर देश में महिलाओं को उनका हक, मान-सम्मान व अधिकार मिल सके इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिन की शुरूआत की।

कब हुई महिला दिवस मनाने की शुरूआत?

जब साल न्यूयॉर्क शहर की औरतें अपने हक के लिए सड़क पर उतर आई तब इस दिन को मनाने की योजना बनाई गई। बता दें कि 1908 में 15 हजार औरतों ने मिलकर नौकरी में ज्यादा काम, कम वेतन और सामान अधिकार ना मिलने जैसे कई मुद्दों पर प्रदर्शन किया था। उनके ऐसा करने के एक साल बाद ही सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इस दिन पहला राष्ट्रीय महिला दिवस (National Womens Day) घोषित कर दिया गया था। वहीं, यूनाइटेड नेशन्स ने आधिकारिक तौर पर, 8 मार्च, 1975 को पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था। 

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कैसे बना?

दरअसल, साल 1910 में कोपेनहेगन में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान 'इंटरनेशनल वुमेन डे' मनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें शामिल 17 देशों की 100 औरतें ने इसका समर्थन किया। इसके बाद साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड के साथ कई देशों में महिला दिवस सेलिब्रेट किया जाने लगा।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस थीम

कोरोना काल में महिलाओं के अतुल्य योगदान को देखते संयुक्त राष्ट्र संगठन ने इस बार की थीम “Women in leadership: Achieving an equal future in a COVID-19 world” रखी है। इसका मतलब है कोविड-19 की दुनिया में एक समान भविष्य की प्राप्ति। इस थीम के जरिए दुनियाभर में लैंगिक जागरूकता को बढ़ावा दिया जाएगा। बता दें कि पिछली बार वुमन्स डे की थीम 'I am Generation Equality: Realizing Women’s Rights' थी।

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स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों, फ्रंट लाइन वर्कर्स, इनोवेटर्स, कम्यूनिटी ऑर्गनाइजर और महामारी से निपटने में महिलाएं अग्रिम पंक्ति में खड़ी रही। लेकिन बावजूद इसके यह आंकड़ा पुरुषों से कम रहा। बेशक महिलाओं ने कोरोना काल में आगे आकर महामारी से निपटने में अपना सहयोग दिया लेकिन पुरुषों के मुकाबले सिर्फ 10 में से 1% महिलाओं की ही इसमें भागीदारी रही।

आज भी खत्म नहीं हुई आवाज उठाने की जरूरत

दुनियाभर में केवल 20 देशों में महिलाएं राज्य और सरकार की प्रमुख हैं। वहीं, राजनीती, व्यापार, नौकरी, समाज और शिक्षा के क्षेत्र में भले ही महिलाएं अपनी भागीदारी दे रही हो लेकिन बावजूद इसके आज भी उन्हें कमजोर समझा जाता है। महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व में लगातार पहले से मौजूद सामाजिक और प्रणालीगत बाधाओं के अलावा, नए अवरोध COVID-19 महामारी के साथ उभरे हैं। दुनियाभर में महिलाओं को घरेलू हिंसा, अवैतनिक देखभाल कर्तव्यों, बेरोजगारी और गरीबी का सामना करना पड़ रहा है।

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देश में बढ़ रहे महिलाओं के साथ अपराध

दूसरी तरफ भारत में पहले महिला सशक्तिकरण के साथ रेप, दहेज, महिला शोषण जैसे अपराधों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। आज भी भारत में लड़कियां रात को अकेले घर से बाहर नहीं निकल सकती। यहां तक कि दिन में भी घर से बाहर निकलते समय उनके व माता-पिता के मन में असुरक्षा की भावना होती है।

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