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रक्षाबंधन कथाएं: इंद्रदेव ने अपनी पत्नी शची से क्यों बंधवाई थी राखी?

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 27 Jul, 2020 05:33 PM
रक्षाबंधन कथाएं: इंद्रदेव ने अपनी पत्नी शची से क्यों बंधवाई थी राखी?

राखी का त्यौहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते व अनमोल प्यार का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई के हाथ में राखी बांधती और उनसे रक्षा का वचन लेती हैं। सदियों से यह त्यौहार यूं ही चला आ रहा है लेकिन इसकी शुरूआत कब हुई इसका कोई प्रमाण नहीं है। मगर, हां रक्षाबंधन को लेकर कई कथाएं जरूर सुनने को मिलती है।

 

कहा जाता है कि इंद्राणी ने भी इंद्र को रक्षासूत्र बांधा था। आज हम आपको लिए रक्षाबंधन से जुड़ी ऐसी ही कुछ कथाएं लेकर आए हैं, जो शायद ही किसी को पता हो। चलिए आपको बताते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी कुछ कहानियां

देवताओं और दैत्यों के बीच छिड़ा युद्ध

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, देवता और दानवों के बीच एक युद्ध 12 वर्षों तक चला लेकिन उसमें देवता विजयी नहीं रहे। तब हार के भय से भगवान इंद्र देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे। गुरु बृहस्पति ने युद्ध रोकने के लिए कहा।

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इसलिए इंद्राणी ने इंद्रदेव को बांधा था रक्षासूत्र

इंद्र की पत्नी महारानी शची ने कहा, कल श्रावण शुक्ल पूर्णिमा है, मैं रक्षा सूत्र तैयार करूंगी। जिससे उनकी रक्षा होगी और वह विजयी होंगे। इंद्राणी शची ने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र तैयार किया। श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई में बांध दी। ब्राह्मण से मंत्रों का उच्चारण करवाकर भगवान इंद्र को बंधवाया। इसके बाद युद्ध में इंद्रदेव की विजय हुई। यह घटना भी सतयुग में ही हुई थी।

द्रौपदी ने बांधी भगवान श्रीकृष्ण को राखी

महाभारत में अनुसार, द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण को राखी बांधी थी, जिसके बाद उन्होंने द्रोपदी को रक्षा का वचन दिया था। शिशुपाल का वध करने के लिए जब भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र चलाया था तो सिर काटने के बाद चक्र कृष्ण जी के पास वापिस आ गया था। उस समय श्रीकृष्ण की उंगली कट जाने पर खून बहने लगा। तभी द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली में बांधा। इसके बाद श्रीकृष्ण ने सदैव उनकी रक्षा का वचन दिया और तभी से सभी बहनें अपने भाईयों को राखी बांधने लगी।

पुरोहितों द्वारा रक्षासूत्र बांधने की परंपरा

कहा जाता है कि रक्षासूत्र बांधने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। उस समय पुरोहितों द्वारा यजमानों को रक्षासूत्र बांधने की परंपरा थी। ऐसा इसलिए किया जाता था कि राजा समाज, धर्म, यज्ञ और पुरोहितों की रक्षा करें।

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