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शादी से पूर्व रखें कुछ बातों का ध्यान

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Views:- Wednesday, April 22, 2015-10:55 AM

सयानी हो रही बेटी की चिंता माता-पिता को सदा ही बनी रहती है जब तक उसके हाथ पीले करके विदा न कर दें । सब मां-बाप बेटी की जिम्मेदारी से शीघ्रता से मुक्त होना चाहते हैं चाहे विवाह के बाद रिश्तों में दरार पड़ जाए । शादी गृहस्थी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है जिसमें नारी को सहनशील, त्याग और समर्पण की मूर्ति बनना पड़ता है। युवा बेटी की पसंद को समझना मां, भाभी व बहनों का दायित्व होता है । प्राय: बेटियों की शिक्षा की कोई अहमियत नहीं समझी जाती । मैट्रिक पास लड़के के साथ बी.ए. पास लड़की का विवाह कर दिया जाता है, केवल इसलिए कि वह सरकारी नौकरी कर रहा है । कुछ माता-पिता एवं रिश्तेदार अपनी बेटियों की शादी अपंग लड़कों के साथ भी कर देते हैं । बेटी के विवाह से पूर्व निम्न बातों को ध्यान में रखें : 

- बेटी की पसंद को सर्वप्रथम ध्यान में रखें । माता-पिता प्रेमपूर्वक बेटी के दिल की बात को समझें ।

- मानसिक व शारीरिक अवगुणों वाले लड़के के साथ बेटी खुश नहीं रह सकती । आर्थिक सपन्नता ही सब कुछ नहीं होती ।

- बेटी की शिक्षा एवं करियर को ध्यान में रखकर ऐसे वर और घर का चुनाव करें जहां उसकी प्रतिभा में रुकावट पैदा न हो।

- दहेज के लोभियों के बीच बेटी सुखी नहीं रह सकती।

- समाज में धनवान परिवारों की बजाय, बेटी का रिश्ता अपने बराबर वाले तथा इज्जतदार घराने के लड़के के साथ करें। वहां बेटी अधिक सुखी रहेगी।

-बेटियों का भी फर्ज बनता है कि माता-पिता से अधिक दहेज ले जाने की जिद न करें।

-विवाह की जोड़ी परमात्मा ऊपर से ही तय करके भेजता है लेकिन जोड़ी सही मिल जाए तो बेटी का संसार खुशियों से भर जाता है।

- आधुनिक युग में फैशन की चकाचौंध से रिश्तों को स्थायी नहीं बनाया जा सकता। बेटियों के लिए वर ढूंढने से पहले अपने सामर्थ्य के अनुसार ही उचित परिवार के लड़के का चुनाव करें जहां बेटी सुखी रह सकती है। वैसे तो सभी माता-पिता अपने सामर्थ्य के अनुसार बेटी के विवाह में खर्च करते हैं जिससे बेटी सुखी रहे।

—विकास बिहानियां


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