
नारी डेस्क: क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग कम खाना खाने के बावजूद भी वजन बढ़ा लेते हैं, जबकि कुछ लोग ज्यादा खाकर भी स्लिम रहते हैं? यह सिर्फ खाने की मात्रा का खेल नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर चलने वाली कई प्रक्रियाओं का असर होता है। वजन बढ़ना सिर्फ ज्यादा खाने की सजा नहीं, बल्कि शरीर की जटिल प्रक्रिया का नतीजा है। आइए समझते हैं पूरी बात
मेटाबॉलिज्म की स्पीड अलग होती है
हर व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) अलग होता है। मेटाबॉलिज्म यानी शरीर की वह प्रक्रिया जिससे खाना ऊर्जा में बदलता है। जिनका मेटाबॉलिज्म तेज होता है, वे कैलोरी जल्दी जला लेते हैं। जिनका मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, उनके शरीर में कैलोरी ज्यादा समय तक जमा रहती है और चर्बी में बदल सकती है। इसलिए दो लोग एक जैसा खाना खाएं, फिर भी वजन अलग हो सकता है।
हार्मोन का असर
हमारे शरीर के हार्मोन वजन बढ़ने या घटने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। थायरॉइड हार्मोन कम हो तो वजन बढ़ सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर शरीर फैट ज्यादा स्टोर करता है। महिलाओं में पीसीओएस जैसी स्थिति भी वजन बढ़ा सकती है। कई बार समस्या खाने की नहीं, हार्मोन की होती है। जिन लोगों के शरीर में मांसपेशियां (मसल्स) ज्यादा होती हैं, उनका शरीर ज्यादा कैलोरी जलाता है। कम मसल मास होने पर शरीर कम कैलोरी खर्च करता है और वजन जल्दी बढ़ सकता है। इसलिए सिर्फ कम खाना काफी नहीं, स्ट्रेंथ एक्सरसाइज भी जरूरी है।
नींद और तनाव
कम नींद लेने से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं। ज्यादा तनाव होने पर शरीर "फैट स्टोरेज मोड" में चला जाता है। कई लोग कम खाते हैं, लेकिन स्ट्रेस और नींद की कमी के कारण वजन बढ़ा लेते हैं। कम खाना मतलब हेल्दी खाना नहीं होता। अगर कोई कम मात्रा में भी ज्यादा शुगर, रिफाइंड कार्ब्स, प्रोसेस्ड फूड खा रहा है तो वजन बढ़ सकता है। कुछ लोगों की बॉडी फैट स्टोर करने के लिए ज्यादा संवेदनशील होती है पर याद रखें जेनेटिक्स वजह हो सकती है, लेकिन पूरी किस्मत नहीं तय करती।
याद रखें
अगर कोई कम खाकर भी वजन बढ़ा रहा है, तो उसे डाइट कम करने की नहीं, बल्कि सही टेस्ट, सही एक्सरसाइज, सही नींद और हार्मोन बैलेंस की जरूरत हो सकती है।