
नारी डेस्क : उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर विश्व के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यह देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है। महाशिवरात्रि से पहले यहां एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसे शिव नवरात्रि कहा जाता है। यह उत्सव पूरे 9 दिनों तक चलता है और 10वें दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।
विवाह उत्सव के रूप में मनाई जाती है शिव नवरात्रि
उज्जैन में शिव नवरात्रि को भगवान महाकाल के विवाह उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है। इन नौ दिनों में बाबा महाकाल का प्रतिदिन दूल्हे के रूप में विशेष श्रृंगार किया जाता है। वहीं अंतिम दिन महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल को सेहरा धारण कराया जाता है, जिसे इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक क्षण माना जाता है।

शिव नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?
शिव नवरात्रि 2026 की शुरुआत
6 फरवरी 2026 (फाल्गुन कृष्ण पक्ष पंचमी) से होगी
और 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के साथ इसका समापन होगा
मान्यता है कि पूरे भारत में केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही शिव नवरात्रि मनाई जाती है।
इन नौ दिनों में मंदिर में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, पाठ और अलौकिक श्रृंगार होते हैं।

शिव नवरात्रि 2026: 9 दिनों का पूरा शेड्यूल
6 फरवरी 2026 (पहला दिन): शिव नवरात्रि की शुरुआत। 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्राभिषेक और पाठ की शुरुआत। महाकाल का विशेष श्रृंगार।
7 फरवरी 2026 (दूसरा दिन): महाकाल को नए वस्त्र पहनाए जाएंगे और विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
8 फरवरी 2026 (तीसरा दिन): शेषनाग पर महाकाल का श्रृंगार। एकादश-एकादशनी रुद्रापाठ।
9 फरवरी 2026 (चौथा दिन): घटाटोप श्रृंगार। महाकाल को कटरा, मेखला, टुपट्टा, मुकुट, मुंडमाल, छत्र और पुष्पमालाएं धारण कराई जाएंगी।
10 फरवरी 2026 (पांचवां दिन): छबीना श्रृंगार। भगवान पीले वस्त्र, मुकुट, मुंडमाल और फलों की माला धारण करेंगे।
11 फरवरी 2026 (छठा दिन): महाकाल का होलकर श्रृंगार किया जाएगा।
12 फरवरी 2026 (सातवां दिन): उमा-महेश स्वरूप में श्रृंगार। इस दिन बाबा महाकाल और माता पार्वती दोनों के दर्शन होंगे। बाबा को कत्थई रंग का वस्त्र पहनाया जाएगा।
13 फरवरी 2026 (आठवां दिन): बाबा महाकाल को लाल वस्त्र धारण कराए जाएंगे।
14 फरवरी 2026 (नौवां दिन): महाकाल शिव तांडव रूप में भक्तों को दर्शन देंगे।
15 फरवरी 2026: महाशिवरात्रि का महापर्व। महाशिवरात्रि के दिन भगवान महाकाल को सप्तधान मुखौटा पहनाया जाएगा।
भक्तों के लिए मंदिर लगातार 44 घंटे खुला रहेगा, जिससे श्रद्धालु अखंड दर्शन कर सकेंगे।