
नारी डेस्क : इस साल गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा को पहली बार फिल्म डायरेक्टर के रूप में संजय लीला भंसाली प्रतिनिधित्व करेंगे। यह पहल भारतीय सिनेमा की सांस्कृतिक समृद्धि, क्रिएटिव एक्सीलेंस और ग्लोबल प्रभाव को सामने लाती है, एक ऐसा आर्ट फॉर्म जो लंबे समय से दुनिया भर में भारत का सबसे मजबूत सांस्कृतिक एंबेसडर रहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने संजय लीला भंसाली के साथ मिलकर इंडियन सिनेमा को सेलिब्रेट करने वाली झांकी तैयार की है, जो 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर नजर आएगी। यह ऐतिहासिक पल इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार कोई फिल्म डायरेक्टर देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह में सिनेमा का प्रतिनिधित्व करेगा।
सिनेमा की सांस्कृतिक समृद्धि
संजय लीला भंसाली इंडियन सिनेमा के सच्चे फ्लैग-बेयरर माने जाते हैं। उनके निर्देशन में बनी फिल्मों ने भारतीय परंपरा, भव्यता और कहानी कहने के नए अंदाज को वैश्विक मंच पर पहुंचाया है। उनकी शैली में गहरी कहानी, शानदार विज़ुअल्स, म्यूजिक और इमोशन्स का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता है। भंसाली की फिल्मों में शामिल हैं, दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत और गंगूबाई काठियावाड़ी। इन फिल्मों ने भारतीय कहानियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया और वैश्विक दर्शकों के दिल जीतें।
ग्लोबल ऑडियंस पर प्रभाव
संजय लीला भंसाली की फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और ग्लोबल ऑडियंस को भारतीय सिनेमा की सख़्त मेहनत, भव्यता और गहरे इमोशन्स से रूबरू कराया है। यही कारण है कि उन्हें गणतंत्र दिवस परेड में इंडियन सिनेमा का प्रतिनिधि चुना गया है। यह ऐतिहासिक कदम न केवल संजय लीला भंसाली के लिए, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए एक गौरवपूर्ण पल है। यह पहल देशभर में सिनेमा के महत्व और उसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मदद करेगी।