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Warning! साल 2040 तक लोगों की जिंदगी में पूरी तरह जहर घोल देगी ये चीज

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 28 Jan, 2026 09:33 PM
Warning! साल 2040 तक लोगों की जिंदगी में पूरी तरह जहर घोल देगी ये चीज

नारी डेस्क: बढ़ते प्रदूषण और लगातार इस्तेमाल हो रहे प्लासिटक से आज और आने वाली पीढ़ी को बहुत अधिक नुकसान पहुंचेगा। यह सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। हाल ही में हुई नई स्टडी में इस बात की चेतावनी दी गई है कि अगर प्लास्टिक के इस्तेमाल और उत्पादन में बदलाव नहीं किया गया तो साल 2040 तक यह लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा बन सकता है। रिसर्च के अनुसार, प्लास्टिक का पूरा जीवनचक्र यानी उसका निर्माण, इस्तेमाल और निपटान,  हर चरण में इंसानों और पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है।

स्टडीः प्लास्टिक बनाने की प्रक्रियाओं से  32% वायु प्रदूषण

रिसर्च में साल 2016 से 2040 तक के डेटा का विश्लेषण किया गया। अगर मौजूदा तरीके जारी रहे, तो प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान दोगुने हो सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर असर में लगभग 40% योगदान होगा। प्लास्टिक बनाने की प्रक्रियाओं से हवा में होने वाले प्रदूषण का हिस्सा 32% होगा। प्लास्टिक के जीवनचक्र में पर्यावरण में छोड़े जाने वाले जहरीले रसायनों का असर 27% तक होगा। इसके अलावा पानी की कमी, ओजोन परत पर असर और रेडिएशन से होने वाला नुकसान 1% से कम है।

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कैंसर जैसी कई बीमारियों का खतरा

प्लास्टिक के उत्सर्जन से कैंसर और गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक के निर्माण और खुले में जलाने से होता है। 2016 में प्लास्टिक से स्वास्थ्य पर 2.1 मिलियन साल का नुकसान हुआ था, जो 2040 तक 4.5 मिलियन साल तक बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, 2016 से 2040 के बीच ग्लोबल प्लास्टिक सिस्टम लोगों की 83 मिलियन साल की स्वस्थ जीवन अवधि कम कर सकता है।

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बचाव कैसे किया जा सकता?

केवल कचरा इकट्ठा करना और रीसाइक्लिंग सुधारने से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। प्लास्टिक सामग्री बदलने, दोबारा इस्तेमाल करने और उत्पादन को नियंत्रित करने से स्वास्थ्य पर प्रभाव कम किया जा सकता है। नीति बनाने वालों को नए प्लास्टिक के उत्पादन को नियंत्रित करना और गैर-जरूरी इस्तेमाल को कम करना चाहिए। प्लास्टिक के इस्तेमाल पर जितना हो सके रोक लगानी जरूरी है। सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि जनता को भी सजगता और जागरूकता दिखाने की सख्त जरूरत। 

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अगर वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक के उत्पादन और इस्तेमाल में बदलाव नहीं हुआ तो 2040 तक यह न केवल पर्यावरण बल्कि इंसानों की सेहत पर भी गंभीर खतरा बन जाएगा।   

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