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शूटिंग के लिए मां ने किया प्रेरित, अब 24 साल की अंजुम जीत रही एक के बाद एक मेडल

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 21 Sep, 2019 11:02 AM
शूटिंग के लिए मां ने किया प्रेरित, अब 24 साल की अंजुम जीत रही एक के बाद एक मेडल

हर मां चाहती है कि उसके सपनों को उसके बच्चे पूरा करे। इतना ही नही वह अपने बच्चों को सही रास्ता दिखाते हुए उन्हेें पूरा करने में भी मदद करती है। इस बात को नेशनल शूटर खिलाड़ी अंजुम मोदगिल की मां शुभ मोदगिल ने साबित किया है। उन्होंने न केवल छोटी ही उम्र में अपनी बेटी को शूटिंग के बारे में बताया, बल्कि उसे इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया। वहीं 24 साल की अंजूम ने भी अपनी मां के सपने को पूरा करते हुए नेशनल ही नही इंटरनेशनल स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। वह लगातार एक के बाद एक मेडल देश के लिए जीत कर ला रही हैं। चलिए आज बताते है आपको उनके अब तक जीवन सफर के बारे में....

खेल के साथ जारी रखी पढ़ाई

अंजुम का जन्म चंडीगढ़ में हुआ है। वहीं पर उन्होंने अपनी डीएवी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। खेल के लिए पढ़ाई के साथ उन्होंने कभी किसी भी तरह का समझौता नही किया। खेल के साथ ही उन्होंने स्पोर्ट्स साइकोलॉजी में दाखिला लेकर अपनी मास्टर डिग्री भी पूरी की। उन्हें खेल के साथ पेटिंग बनाने के इतना शौक है कि उनके बैग में शूटिंग के साथ पेटिंग का समान जरुर मिल जाता है।

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मां ने राइफल के बारे में दी थी जानकारी 

अंजुम को जीवन में पहली बार राइफल के बारे में उनकी मां ने बताया था। शूटिंग करियर को अपनाने के लिए उनकी मां ने ही उन्हें प्रेरित किया था। इसके बाद अंजुम एनसीसी का हिस्सा बनी यहां पर उन्होंने शूटिंग के गुरक सीखे। शुरुआत में उन्होंने पिस्टल चलाना सीखा उसके बाद राइफल चलानी सीखी। इस समय वह राइफल शूटिंग में 1 नहीं बल्कि 3 अलग- अलग कैटेगिरी में पूरी तरह से माहिर है। वह 10 मीटर एयर राइफल, 50 मीटर प्रोन, 50 मीटर 3 पोजिशन में राइफल चला सकती हैं। अंजुम की मां शूटिंग में अपना करियर बनाना चाहती थी लेकिन किसी कारण वह बना नही सकी इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को इसमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

जरुरी उपकरण व कोच के बिना शुरु की ट्रेनिंग 

अंजुल के शुरुआती दिन काफी मुश्किल भरे थे। उस समय उनके पास न ही किसी तरह के जरुरी उपकरण थे न ही कोई रेगुलर कोच। इतना ही नही ट्रेनिंग के दौरान लगने वाली चोट भी उन्हें काफी परेशान कर रही थी। इन सब परेशानियों के बाद भी उन्होंने हार नही मानी, उनकी मां भी हमेशा उनकी हिम्मत बन कर साथ रही। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई 2013 में उन्हें जूनियर टीम ने रहते हुए एक कोच मिला। जिससे उनके प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ। इसके बाद उन्होंने भारतीय टीम में अपना स्थान बनाया।

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हासिल कर चुकी है यह सम्मान

-  हाल ही में वर्ल्ड शूटिंग टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल ।
-  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अर्जुन अवॉर्ड से किया सम्मानित ।
-  राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप में पंजाब का प्रतिनिधित्व किया। 
-  साउथ कोरिया के चांगवन में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता।

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- कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रोन इवेंट में सिल्वर मेडल जीता।
- ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में आयोजित कॉमनवेल्थ शूटिंग चैंपियन में कांस्य व 10 मीटर एयर राइफल में सिल्वर मेडल जीता। 
- मैक्सिको में इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन वर्ल्ड कप में 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन में सिल्वर मेडल जीता। 
 

 

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