
नारी डेस्क: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी, गलत खान-पान, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियां अब सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। हैरानी की बात यह है कि कई बार दिल पूरी तरह ठीक होने के बावजूद भी स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। ऐसे में जापान में अपनाया जाने वाला एक सरल पारंपरिक उपाय इन दिनों चर्चा में है, जो स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
दिल ठीक होने पर भी क्यों आता है स्ट्रोक?
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क तक खून की सप्लाई अचानक कम या बंद हो जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे—
हाई ब्लड प्रेशर
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
डायबिटीज
मोटापा
धूम्रपान और शराब
अनियमित हार्ट बीट
अधिकतर मामलों में इस्केमिक स्ट्रोक होता है, जिसमें नसों में खून का थक्का जम जाता है और दिमाग तक रक्त नहीं पहुंच पाता।

जापान में अपनाया जाने वाला पारंपरिक उपाय
प्रसिद्ध पोषण विशेषज्ञ श्वेता शाह ने सोशल मीडिया पर जापान की एक आम लेकिन असरदार आदत साझा की है। जापान में लोग रोजाना पैरों को गर्म पानी में डुबोकर रखने की आदत अपनाते हैं। यह तरीका भले ही बहुत साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे स्वास्थ्य से जुड़ा ठोस विज्ञान मौजूद है।
पैरों को गर्म पानी में डालने से क्या फायदे होते हैं?
रोजाना 15 से 20 मिनट तक पैरों को गर्म पानी में रखने से कई फायदे मिल सकते हैं। शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। रक्त नलिकाएं फैलती हैं, जिससे दिल पर दबाव कम पड़ता है। तनाव और थकान में कमी आती है। शरीर और दिमाग को रिलैक्स महसूस होता है। खासकर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए यह उपाय लाभकारी माना जाता है। अगर गर्म पानी में एक चम्मच एप्सम सॉल्ट मिला लिया जाए, तो मांसपेशियों को अतिरिक्त आराम मिलता है। यह उपाय नींद न आने (अनिद्रा) की समस्या में भी मददगार हो सकता है।

स्ट्रोक के शुरुआती चेतावनी संकेत
स्ट्रोक अचानक आता है, लेकिन शरीर पहले से कुछ संकेत देता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है अचानक संतुलन बिगड़ जाना आंखों से साफ न दिखना या नजर में बदलाव। मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाना। दोनों हाथ उठाने पर एक हाथ का नीचे गिर जाना। बोलने में लड़खड़ाहट या शब्द साफ न निकल पाना। इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
कुछ लोगों में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है । 65 साल से अधिक उम्र के लोग। ज्यादा धूम्रपान या शराब सेवन करने वाले। बार-बार माइग्रेन या तेज सिरदर्द से परेशान लोग। हाई ब्लड शुगर या टाइप-2 डायबिटीज के मरीज। जापानियों द्वारा अपनाया गया यह छोटा-सा दैनिक अभ्यास किसी इलाज का विकल्प नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली के साथ मिलकर यह स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। किसी भी नए उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें, खासकर अगर पहले से कोई गंभीर बीमारी हो। याद रखें, छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही लंबे समय में बड़ा फर्क लाती हैं।
