
नारी डेस्क: काशी यानी वाराणसी, भगवान शिव की नगरी, महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरे देश में अपनी खास धूमधाम और भव्य परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी, लेकिन इसके पहले ही बाबा विश्वनाथ के मंदिर में भव्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। खास तौर पर बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती के विवाहोत्सव की तैयारियों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है।
बाबा विश्वनाथ को कब लगेगी हल्दी?
इस बार भी परंपरा के अनुसार 13 फरवरी 2026 को पूर्व महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंच बदन प्रतिमा को विधि-विधान से शगुन की हल्दी लगाई जाएगी। यह अनुष्ठान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाहोत्सव की शुरुआत का संकेत माना जाता है। हल्दी समारोह के दौरान मंदिर में पारंपरिक तरीके से सभी अनुष्ठान पूरे किए जाएंगे। महिलाएं बाबा के लिए मांगलिक गीत गाएंगी और भक्त श्रद्धा भाव से बाबा को हल्दी चढ़ाएंगे। इस विधि को बाबा के विवाह का सांकेतिक आयोजन भी माना जाता है।

महाशिवरात्रि के दिन विश्वनाथ मंदिर की रौनक
काशी में महाशिवरात्रि का उत्सव अन्य शहरों से बिल्कुल अलग होता है। मंदिरों और शिवालियों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। इस दिन सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है और रुद्राभिषेक, हवन और पूजन के कार्यक्रम देर रात तक जारी रहते हैं। इस मौके पर शिव बारात भी निकलती है, जिसमें अलग-अलग जगहों से श्रद्धालु शामिल होकर बाबा शिव की पूजा करते हैं। बाबा विश्वनाथ के मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ और भव्य सजावट इसे और भी खास बनाती है।
काशी में महाशिवरात्रि का महत्व
काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपराएं सदियों पुरानी हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती के विवाहोत्सव का आयोजन भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। यहां की धार्मिक रौनक, श्रद्धालुओं की भक्ति और पारंपरिक अनुष्ठान इसे अन्य जगहों से अलग और अद्भुत बनाते हैं।

इस बार भी 13 फरवरी से शुरू होने वाला हल्दी समारोह और 15 फरवरी का महाशिवरात्रि उत्सव, वाराणसी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवंत करने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा।