नारी डेस्क: दिल्ली के ओखला स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद मुश्किल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों ने 80 साल की एक महिला के पेट से 50 सेंटीमीटर आकार और 10.4 किलो वजन का बहुत बड़ा ट्यूमर निकाला। यह ट्यूमर लिपोसारकोमा था, जो फैटी टिश्यू में होने वाला एक दुर्लभ कैंसर होता है। डॉक्टरों के अनुसार, अपने आकार और वजन के कारण यह अब तक निकाले गए दुनिया के सबसे बड़े लिपोसारकोमा ट्यूमर में से एक माना जा रहा है।
गैस समझकर 2 साल तक चलती रही दवा
महिला को पिछले दो साल से पेट में सूजन, दर्द और भारीपन की समस्या थी। पेट धीरे-धीरे इतना फूल गया था कि वह गर्भवती महिला जैसा दिखने लगा। कई जगह इलाज कराने के बावजूद सही जांच नहीं हो पाई और डॉक्टरों ने इसे गैस की समस्या मानकर सिर्फ दवाएं दे दीं।
अंदरूनी अंगों पर बना रहा था दबाव
जांच में पता चला कि यह ट्यूमर पेट के अंदर गहराई तक फैल चुका था। यह गुर्दे (किडनी) ,बड़ी आंत ,मूत्राशय गर्भाशय जैसे जरूरी अंगों पर दबाव डाल रहा था। महिला की उम्र ज्यादा होने और पहले से कुछ बीमारियां होने की वजह से सर्जरी का खतरा और बढ़ गया था।
कैसे की गई इतनी बड़ी सर्जरी?
डॉक्टरों ने ऑपरेशन से पहले पूरी तैयारी की और अलग-अलग विशेषज्ञों की सलाह ली। सर्जरी के दौरान ट्यूमर को बहुत सावधानी से आसपास के अंगों से अलग किया गया, ताकि किसी भी अंग को नुकसान न पहुंचे। यह सर्जरी कई घंटों तक चली और इसमें डॉक्टरों की पूरी टीम की मेहनत और तालमेल शामिल रहा।
अब तक के सबसे बड़े ट्यूमर में से एक
मेडिकल इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा लिपोसारकोमा लगभग 45 किलो का दर्ज किया गया है, लेकिन आमतौर पर 10 किलो से ज्यादा वजन वाले ट्यूमर बहुत ही दुर्लभ होते हैं। भारत और दुनिया में ऐसे मामले बहुत कम सामने आए हैं।

सर्जरी के बाद मरीज की हालत
सर्जरी के बाद महिला की हालत स्थिर रही। करीब 12 दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह सफल ऑपरेशन फोर्टिस एस्कॉर्ट्स के मल्टीडिसीप्लिनरी कैंसर केयर प्रोग्राम की मजबूती को दिखाता है।
डॉक्टरों की टीम और उनका बयान
डॉक्टरों के मुताबिक, इस सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती ट्यूमर निकालते समय मरीज के जरूरी अंगों की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना था, जिसे सही योजना और टीमवर्क से संभव बनाया गया। अगर लंबे समय तक पेट फूलना, दर्द या सूजन बनी रहे, तो उसे सिर्फ गैस समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर पूरी जांच कराना बहुत जरूरी है, क्योंकि छोटी लगने वाली समस्या भी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है।