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हर नारी हो आत्मनिर्भर : कमलजीत कौर

हर नारी हो आत्मनिर्भर : कमलजीत कौर
Views:- Friday, September 12, 2014-8:37 AM

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर किसी के पास पर्याप्त ज्ञान होना जरूरी है। अकेला ज्ञान तब तक किसी काम का नहीं जब तक उसका सही इस्तेेमाल न हो। होशियारपुर की तहसील गढ़शंकर के गांव कुकड़ां निवासी कमलजीत कौर ने अपने ज्ञान की शक्ति को सिर्फ प्रदर्शित ही नहीं किया बल्कि समाज की भलाई के लिए भी इस्तेमाल किया है। उनका एक ही उद्देश्य है कि हर नारी आत्मनिर्भर हो। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने गत 10 वर्षों में होशियारपुर के 250 के करीब गांवों में स्वयंसेवी समूहों की स्थापना की।  साथ ही उनके संचालन और शिक्षा का जिम्मा भी वह निभा रही हैं।


 इसके लिए उन्हें प्रदेश स्तरीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। हाल ही में उन्होंने होशियारपुर की जिला जेल में हिमाचल प्रदेश की जानी-मानी समाज सेविका सिमरन के सहयोग से महिलाओं का एक स्वयंसेवी समूह गठित किया है।

प्रगतिशील सोच वाली परमजीत कौर के सहयोग से अगस्त 2002 में सिंह सभा सैल्फ-हैल्प ग्रुप की स्थापना की। अपने जीवन साथी जोगा सिंह से भी उन्हें बहुत प्रोत्साहन मिला। उन्होंने हर काम में उनका पूरा साथ दिया और हमेशा उन्हें हिम्मत बंधाई।

कमलजीत के शानदार कार्यों को देखते हुए उनकी बहुत सी साथिनों ने भी प्रयत्न करने शुरू किए। बैंकों से संबंधित अधिकारियों से सम्पर्क, सरकार की नई स्कीमों का प्रचार-प्रसार करके उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं में एक नई रूह फूंकी। उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वह एक महिला हैं। उनमें किसी भी पुरुष की तरह हर मसले को समझने की हिम्मत और सूझ-बूझ है। हिम्मत और लगन उनकी जिंदगी के विशेष गुण हैं। विनम्र होकर पानी की तरह बहती हुई वह हर जगह अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ जाती हैं। इसी कारण नाबार्ड की ओर से उनके स्वयंसेवी ग्रुप सिंह सभा कुकड़ां को सम्मानित किया गया।

महात्मा गांधी की कुटीर उद्योग की धारणा को वह एक बार फिर समाज में प्रफुल्लित कर रही हैं। उनसे प्रेरित होकर कोई सब्जियां उगा रहा है तो कहीं लड़कियां कलात्मक चीजें तैयार कर रही हैं। इस तरह वह हर पल इन कार्यों में व्यस्त रहती हैं। भूमि में घातक तत्वों के प्रभाव को खत्म करने के लिए जैविक खाद इनके ग्रुप द्वारा तैयार करवाई गई है। उन्होंने सैंकड़ों लड़कियों को सरकारी संस्थानों से कोचिंग दिलवा कर व्यवसाय में उनकी सहायता की है।

नाबार्ड के माध्यम से कमलजीत ने सरकारी निर्देशानुसार राष्ट्रीय स्तर की कांफ्रैंसों में भी भाग लिया। इसके बाद उन्होंने इनके बारे में अपने ग्रुपों में जाकर बताया। सांझा खेती के विचार को उन्होंने महिला किसान क्लब स्थापित कर वास्तविक रूप दिया जिसकी कार्यप्रणाली का अध्ययन करने के लिए विभिन्न विभागों के शोधकर्ता, अधिकारी तथा स्वयंसेवी अक्सर आते रहते हैं। इस संबंध में उन्होंने डा. गिरिजा व्यास चेयरपर्सन नैशनल कमीशन फॉर वूमन के नेतृत्व में नैशनल कंसल्टिंग प्रोग्राम में भी 2010 में भाग लिया।  पर्यावरण संबंधी महिला कांफ्रैंस में भी उन्होंने पंजाब की ओर से भाग लेकर प्रदेश का नाम चमकाया। इसी तरह राष्ट्रीय तथा प्रदेश स्तरीय वूमन और सैल्फ हैल्प ग्रुपों की कांफ्रैंसों का नेतृत्व वह करती आ रही हैं।

नाबार्ड की ओर से गोवा में लगाई गई प्रदर्शनी में दिसम्बर 2011 में उनके ग्रुप ने भाग लिया। चंडीगढ़ में उत्तरी क्षेत्र के सैल्फ हैल्प ग्रुपों द्वारा तैयार चीजों की एक प्रदर्शनी भी उनके द्वारा लगाई गई। उन्होंने मुम्बई में आयोजित नैशनल कांफ्रैंस फॉर वूमन में भी हिस्सा लिया। उनके ग्रुप द्वारा पंजाब नैशनल बैंक ब्रांच पद्दी सूरा सिंह की ओर से दिल्ली हाट में लगाई गई 15 दिन की प्रदर्शनी में भी भाग लिया गया।
कमलजीत महिला कल्याण के लिए दिन-रात काम कर रही हैं।

महिलाओं के लिए उनकी अपील है कि यदि नारी शक्ति का सम्मान कायम रखना है तो खुद को निपुण बनाएं और अपने चरित्र को हमेशा ऊंचा रखें। उनके नेतृत्व में महिला किसान क्लब में उनकी साथिनों चरणजीत कौर, सुरजीत कौर, अमला देवी, राजविन्द्र कौर, सीता रानी, सुरिन्द्र कौर, मंजीत कौर, सुलिन्द्र कौर तथा अंजलि ने ठेके पर जमीन पर फार्मिंग और मार्कीटिंग का प्रबंध स्वयं किया। साधारण परिवारों की ये महिलाएं अपनी मेहनत से अब कहीं दिहाड़ी करने नहीं जातीं,  बल्कि अपने व्यवसाय को बुलंदियों की ओर ले जा रही हैं। उनका जीवन स्तर भी ऊंचा हो रहा है।
कमलजीत कौर अपनी शानदार उपलब्धियों के कारण गत एक वर्ष से पंच भी बनी हुई हैं परन्तु वह सरपंच तथा अन्य के मुकाबले कहीं ज्यादा काम कर रही हैं।

सरकारी सहायता से जहां गांव का विकास हो रहा है वहीं महिलाओं के अंदर आत्मनिर्भरता का बल भी भरा जा रहा है। इस तरह यह सैल्फ-हैल्प ग्रुप कमलजीत कौर के नेतृत्व में एक मार्गदर्शक का काम कर रहा है। कमलजीत को प्रदेश स्तरीय सम्मान के अतिरिक्त अन्य कई संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। वह एक पल भी खाली नहीं बैठतीं। दिन-रात महिलाओं को नई दिशा प्रदान करने में जुटी रहती हैं। इस तरह वह कई युवतियों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई हैं। उनके द्वारा महिलाओं की भलाई के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी काफी लाभ पहुंचाया जा रहा है।

    प्रस्तुति : बलजिन्द्र मान, माहिलपुर