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World Sickle Cell Day 2022: क्या होता है सिकल सेल डिसऑर्डर, जानिए इस साल की थीम

  • Edited By palak,
  • Updated: 19 Jun, 2022 11:36 AM
World Sickle Cell Day 2022: क्या होता है सिकल सेल डिसऑर्डर, जानिए इस साल की थीम

हर साल पूरे विश्व में आज के दिन यानि की 19 जून को वर्ल्ड सिकल सेल डे मनाया जाता है। लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए यह दिन सेलिब्रेट किया जाता है। यह रेड ब्लड सेल डिसऑर्डर से संबंधित एक जेनेटिक बीमारी होती है, जिसके कारण व्यक्ति के शरीर में रेड ब्लड सेड की कमी हो जाती है। इसे सिकल सेल एनीमिया भी कहा जाता है। हर साल इस दिन को इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगो में सिकल सेल डिसऑर्डर के प्रति जागरुकता फैलाई जाए। साल 2008 में यूनाइटेड नेशनल जनरल असेंबली ने सिकल सेल डिसऑर्डर को पब्लिक हेल्थ से जुड़ी समस्या के तौर पर पहचाना था। इसके बाद लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए यह दिन मनाया जाता है। शोध के अनुसार, यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रेड ब्लड सेल्स की कमी के कारण पूरे शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन अच्छे से नहीं पहुंच पाता है। आइए जानते हैं कि यह बीमारी कैसे शुरु हुई थी। 

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क्या होता है सिक्ल सेल एनीमिया?

यह कई तरह की शारीरिक बीमारियों के कारण होता है, जो रेड ब्लड सेल्स को प्रभावित करता है। इस बीमारी को मुख्य कारण यह है कि किसी भी व्यक्ति को यह रोग सिर्फ जेनेटिक कारणों से ही होता है। इस बीमारी के किसी और तरह से होने की कोई आशंका नहीं होती। शरीर में रेड ब्लड सेल्स गोल आकार में होते हैं।  जिस व्यक्ति को सिकल सेल की समस्या होती हैं उसके ब्लड सेल्स कठोर और नुकीले आकार में बदल जाते हैं, जिसके कारण शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऐसे में व्यक्ति को शरीर में बहुत दर्द भी हो सकता है। 

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क्या है इस साल की थीम? 

इस साल सिकल सेल एनीमिया की थीम है 'शाइन द लाइट ऑन सिकल सेल' जिसका अर्थ सिकल सेल पर रोशनी डालने से जुड़ा हुआ है। 

कब आया था भारत में पहला सिकल सेल डिसऑर्डर का मामला? 

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस रोग से जुड़ा हुआ मामला साल 1952 में सामने आया था। नीलगिरी पहाड़ियों पर रहने वाले एक व्यक्ति में मिला था। आज के समय में  भारत में इस रोग से जुड़े मामले करीबन हर क्षेत्र में सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो मध्य प्रदेश के कुल जिलों में 75% सिकल सेल एनीमिया के मामले सामने आए हैं। यह आंकड़ें साल 2020-2021 में पाए गए हैं, और यह सारे आदिवासी बाहुल्य जिले हैं। 

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