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क्या है आईवीएफ, किस मौसम करवाना है बेस्ट?

क्या है आईवीएफ, किस मौसम करवाना है बेस्ट?
Views:- Thursday, October 25, 2018-1:09 PM

बच्चे भगवान का दिया सबसे खूबसूरत तौहफा है लेकिन कुछ महिलाएं इस सुख से वंचित रह जाती हैं। बच्चा पैदा न करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन आजकल विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि आईवीएफ तकनीक के जरिए मां बनने की उम्मीद बढ़ जाती है। 

क्या हैं आईवीएफ? 
आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन है, इस प्रक्रिया द्वारा पति-पत्नी अपना बच्चा पैदा कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले अंडों के उत्पादन के लिए महिला को फर्टिलिटी दवाइयां दी जाती हैं। इसके बाद सर्जरी के माध्यम से अंडो को निकाल कर प्रयोगशाला में कल्चर डिश में तैयार पति के शुक्राणुओं के साथ मिलाकर निषेचन(Fertilization) के लिए रख दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया जाता है। लैब में इसे दो या तीन दिन रखा जाता है, फिर पूरी जांच के बाद इससे बने भ्रूण को वापिस महिला के गर्भ में इम्प्लांट कर दिया जाता है। आईवीएफ की इस प्रक्रिया में दो से तीन हफ्ते का समय लग जाता है। बच्चेदानी में भ्रूण इम्प्लांट करने के बाद 14 दिनों में ब्लड या प्रेग्नेंसी टेस्ट के जरिए इसकी सफलता और असफलता का पता चलता है। 

आईवीएफ के लिए सही मौसम
आईवीएफ की सफल तकनीक में मौसम का बहुत प्रभाव पड़ता है। आप भी इस बारे में सोच रहे हैं तो महिला होने के चलते हर महीने होने वाले बदलावों के बारे में आपको पूरी जानकारी होना जरूरी है। सूरज की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी सफल आईवीएफ की संभावना को बहुत बढ़ा देता है। एक शोध में यह बात सामने आई है कि शिशु के विकास के लिए विटामिन डी अहम भूमिका निभाता है। जो महिलाएं इनफर्निलिटी की समस्या से जूझ रही उनके लिए जून, जुलाई और अगस्त का महीना खास है। 

गर्मियों में बढ़ जाती है आईवीएफ की संभावना
महिलाओं में आईवीएफ के इलाज से गर्भधारण की संभावनाएं गर्मी के मौसम में दोगुनी बढ़ जाती है। इसका कारण सूरज की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी है जो इस मौसम में आसानी से मिल जाता है और विटामिन डी शिशु के विकास में भी एक बड़ा सहायक स्रोत माना जाता है। 
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बच्चा होगा स्वस्थ
जिन महिलाओं में विटामिन डी का स्तर बहुत कम होता है, उन्हें गर्भधारण करने में कई तरह की परेशानियां आती हैं। वहीं, जो महिलाएं आईवीएफ साइकिल शुरू करने से पहले अधिक समय तक धूप में रहती हैं, उनके ट्रीटमेंट के स्तर में बहुत सुधार आता है। उनमें उच्च क्वालिटी के भ्रूण निर्मित होने की संभावना अधिक रहती है 

आईवीएफ के बारे में लोगों की धारणाएं
कुछ लोग समझते हैं कि आईवीएफ प्रक्रिया में बच्चा आपका नहीं होता लेकिन यह बहुत गलत धारणाएं हैं। इसमें अंडा पत्नी और शुक्राणु पति के ही होते हैं। इस ट्रीटमेंट से पैदा होने वाला बच्चा पति-पत्नी का ही होता है। 
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