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अनोखा रिवाज यहां दुल्हन नहीं दूल्हे की होती है विदाई

  • Edited By Priya dhir,
  • Updated: 01 Apr, 2019 09:30 AM
अनोखा रिवाज यहां दुल्हन नहीं दूल्हे की होती है विदाई

हम अक्सर देखते हैं कि शादी के बाद दुल्हन की विदाई होती हैं लेकिन हमारे देश में एक ऐसी जगह भी हैं जहां दुल्हन की नहीं बल्कि दूल्हे की विदाई होती हैं। जी हां,यह अनोखा नियम मेघालय में निभाया जाता है। 

दुल्हन नहीं दुल्हे की होती हैं विदाई

यहां के लोग भारत के बाकी हिस्सों में रहने वाले लोगों से काफी अलग हैं। मेघालय की तीनों जनजातियों- गारो, खासी और जयंतियां में शादी के बाद यहां दुल्हन की विदाई नहीं होती बल्कि दूल्हे की विदाई होती है। रिवाज के मुताबिक लड़का शादी के बाद लड़की के घर जाकर रहता है। यहां पर पिछले 2000 साल से ऐसा हो रहा है। यहां को लोगों के मुताबिक यह परंपरा पूर्वजों के समय से निभाई जा रही हैं। यह परंपरा इतनी मजबूत है, कि अगर लड़का पंजाब का रहने वाला भी है, और वो मेघालय की किसी लड़की से शादी करता है,तो उसे शादी के बाद लड़की के घर में ही रहना होता है।
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बेटी के पैदा होने पर मनाया जाता हैं जश्न

खासी समुदाय में अगर किसी घर में बेटी पैदा होती है तो धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है। यहां लड़की के नाम पर ही वंश चलता है यानी कि अगर किसी पति-पत्नी के घर बच्चा होता है तो वो बच्चा अपनी मां का नाम सरनेम के तौर पर लगाता है। इस समुदाय में पेरेंट्स की प्रॉपटी पर पहला हक बेटी का होता है। 
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रिवाज के अनुसार परिवार की सबसे छोटी बेटी को प्रॉपर्टी मिलती है हालांकि अगर लड़की चाहे तो वो अपनी मर्जी से प्रॉपर्टी में अपने भाइयों को भी हिस्सा दे सकती हैं। साथ में छोटी बेटी पर ही अपने मां-बाप की देखभाल करने की जिम्मेदारी होती है। यहां पर लड़कियां अपनी पसंद से काम कर सकती हैं। यही नहीं लड़कियां रात में भी आराम से घूम सकती हैं। औरतें छोटी-छोटी दुकानें भी चलाती हैं। यहां पर दहेज जैसा भी कुछ नहीं है। लड़कियों को बराबर का हक मिलता है। 
 

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