
नारी डेस्क: बहुत से लोग खाने- पीने के मामले में बेहद लापरवाह होते हैं, उन्हें मालूम ही नहीं होता कि उनके शरीर के लिए क्या सही है क्या गलत। प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार स्वस्थ शरीर और शांत मन के लिए भोजन हमेशा सीमित और संतुलित मात्रा में करना चाहिए। उनका कहना है कि भोजन शरीर के लिए है, शरीर भोजन के लिए नहीं। अगर मनुष्य खाने पर नियंत्रण रख ले, तो तन और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
खाने से पहले करना चाहिए नाम जाप
प्रेमानंद जी महाराज ने बताया- 24 घंटे में जितना भोजन लिया जाना चाहिए वह लगभग 390 ग्राम है। साधारण रूप से इसका मतलब यह है: “दो रोटी के साथ एक कटोरी दाल” पर्याप्त है। महाराज जी ने यह भी कहा है कि भोजन “इतना हो कि हल्का हल्का भूख बनी रहे” , जैसे अगर आप पूछें “क्या अभी एक रोटी और खाई जा सकती है?और जवाब ‘हां’ हो, तो थोडा रोको। भोजन करते समय यह भी कहा गया कि इसे ‘प्रसाद’ की तरह ग्रहण करें — पहले नाम जप या ध्यान, फिर भोजन” ।
भोजन खाते समय न करें क्रोध
महाराज जी का मानना है कि भोजन पेट भरने के लिए नहीं, शरीर को साधन और मन को शांत रखने के लिए खाना चाहिए। भोजन को ‘प्रसाद’ मानकर खाएं, साफ मन और श्रद्धा से। खाते समय गुस्सा, चिंता या मोबाइल-टीवी से ध्यान हटाकर शांति से खाएं। ध्यान रखें महाराज जी का यह सुझाव सामान्य नागरिकों के लिए है - किसी विशेष रोग-स्थिति, गर्भावस्था या अन्य विशेष अवस्था में अलग सलाह हो सकती है।
भोजन के साथ कुछ जरूरी नियम
तीन भाग सिद्धांत:
पेट का ½ हिस्सा भोजन से,
¼ हिस्सा पानी से,
और ¼ हिस्सा खाली रहना चाहिए (सांस और पाचन के लिए)।
धीरे-धीरे खाएं, हर कौर को अच्छे से चबाएं। भूख से थोड़ा कम खाएं, ताकि शरीर हल्का और सक्रिय रहे। भोजन सात्विक हो – ताज़ा, घर का बना, कम तेल-मसाले वाला।