नारी डेस्क : जैसे ही 31 दिसंबर की रात घड़ी की सुइयां 12 की ओर बढ़ती हैं, पूरी दुनिया में उत्साह अपने चरम पर पहुंच जाता है। आखिरी 10 सेकेंड की उलटी गिनती शुरू होती है—10, 9, 8… और ठीक 12 बजते ही हर तरफ “हैप्पी न्यू ईयर” की गूंज सुनाई देने लगती है। आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठता है, मोबाइल फोन पर शुभकामनाओं की बाढ़ आ जाती है और लोग एक-दूसरे को गले लगाकर नए साल का स्वागत करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नया साल 1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है? और इस नए साल की शुरुआत को हम और अधिक सकारात्मक व सार्थक कैसे बना सकते हैं? आइए जानते हैं।
1 जनवरी को ही नव वर्ष क्यों मनाया जाता है?
नव वर्ष मनाने की परंपरा सीधे तौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर से जुड़ी हुई है, जिसे आज दुनिया के अधिकांश देश अपनाते हैं। इस कैलेंडर की जड़ें प्राचीन रोमन सभ्यता में मिलती हैं। शुरुआत में रोम में नया साल मार्च महीने से शुरू होता था, लेकिन ईसा पूर्व 46 में रोमन सम्राट जूलियस सीज़र ने कैलेंडर में सुधार करते हुए जनवरी को साल का पहला महीना घोषित किया। इसके बाद साल 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने इसमें और संशोधन किए और ग्रेगोरियन कैलेंडर को लागू किया गया। तभी से 1 जनवरी को पूरी दुनिया में नव वर्ष के रूप में मनाया जाने लगा।
जनवरी महीने का नाम रोमन देवता जेनस (Janus) के नाम पर रखा गया था, जिन्हें शुरुआत, परिवर्तन और द्वार का देवता माना जाता था। जेनस के दो चेहरे थ। एक अतीत की ओर और दूसरा भविष्य की ओर। यही वजह है कि 1 जनवरी को पुराने साल से सीख लेकर नए भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है।
भारत में नव वर्ष की विविध परंपराएं
भारत में नव वर्ष केवल 1 जनवरी तक सीमित नहीं है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों में इसे विभिन्न तिथियों पर मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिंदू नव वर्ष), बैसाखी, उगादी, गुड़ी पड़वा, पुथांडु औरर नवरेह। हालांकि वैश्विक स्तर पर मनाया जाने वाला 1 जनवरी का नव वर्ष अब भारत में भी व्यापक रूप से स्वीकार किया जा चुका है, खासकर शहरी जीवन और आधुनिक संस्कृति में।
नए साल 2026 की शुरुआत ऐसे करें
नया साल सिर्फ जश्न और शुभकामनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि यह आत्मचिंतन और आत्मसुधार का अवसर भी बने। आइए जानते हैं कुछ सरल लेकिन प्रभावी तरीके।
सकारात्मक संकल्प लें
नया साल नई उम्मीदों और नए लक्ष्यों का प्रतीक होता है, इसलिए इस अवसर पर ऐसे संकल्प लेना ज़रूरी है जिन्हें आप वास्तव में अपने जीवन में उतार सकें। बेहतर स्वास्थ्य का ध्यान रखना, समय पर सोना-जागना, रोज़ाना थोड़ा-बहुत व्यायाम करना, मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग को सीमित करना और कोई नया कौशल सीखने की कोशिश करना ऐसे संकल्प हैं जो न सिर्फ जीवनशैली को बेहतर बनाते हैं, बल्कि पूरे साल सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करते हैं।
बीते वर्ष से सीख लें
2025 में जो अच्छा रहा, उसे आगे बढ़ाएं और जो गलतियां हुईं, उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें। अनुभवों से सीखा गया सबक ही नए साल को सार्थक बनाता है।
अपनों के साथ समय बिताएं
नए साल के पहले दिन परिवार और प्रियजनों के साथ समय बिताना रिश्तों को और मजबूत करता है। यह दिन भावनात्मक जुड़ाव का होना चाहिए।
दिल से शुभकामनाएं दें
नव वर्ष की शुभकामनाएं सिर्फ औपचारिक संदेश न हों। दिल से दी गई शुभकामनाएँ सामने वाले के दिन को खास बना सकती हैं।
सेवा का संकल्प लें
अगर नए साल की शुरुआत किसी जरूरतमंद की मदद से हो जाए, तो उसका आनंद दोगुना हो जाता है। किसी दीन-हीन, असहाय, जरूरतमंद या दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नए साल पर पहली नेकी करने का संकल्प लें।
नव वर्ष 2026: एक नई शुरुआत
नव वर्ष 2026 हमें अपने सपनों को फिर से नई उड़ान देने का अवसर दे रहा है। याद रखें, नया साल अपने आप में कुछ नहीं बदलता, बदलाव हम अपने विचारों, आदतों और कर्मों से लाते हैं।