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Navratri Special: सेहत को ध्यान में रखते हुए रखें व्रत

  • Edited By Harpreet,
  • Updated: 03 Oct, 2019 12:25 PM
Navratri Special: सेहत को ध्यान में रखते हुए रखें व्रत

व्रत रखने की प्रक्रिया समाज को हिंदू धर्म की देन है। व्रत रखना न केवल एक पवित्र प्रक्रिया है बल्कि इसका गहरा संबंध आपके स्वास्थय से भी जुड़ा हुआ है। शरीर में मौजूद टॉक्सिंस को खत्म करने के लिए उपवास एक बेहतरीन तरीका है। इस बात की पुष्टि आयुर्वेद भी करता है। उनके अनुसार हर व्यक्ति को हफ्ते में एक बार व्रत जरुर रखना चाहिए। तो चलिए आज बात करते हैं व्रत रखने से जुड़ी कुछ खास बातें।

क्यों जरुरी है व्रत ?

हफ्ते में एक बार खुद को भोजन से दूर रखने के कई लाभ है। जैसे कि हफ्ते में एक दिन व्रत करन से शरीर मे मौजूद वेषैले पदार्थ अपने आप खत्म हो जाते हैं। हफ्ते में एक बार उपवास करने से बॉडी में गैस, अपच, एसिडिटी और भारीपन की समस्या से आपको राहत मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से शरीर के वात, पित्त और कफ अच्छे से काम करते हैं। जिसका सीधा असर आपकी सेहत और साथ ही स्वभाव पर भी पड़ता है। जी हां, हफ्ते में एक दिन भूखे रहने से या फिर फल-फ्रूट खाने से व्यक्ति मानसिक स्तर भी खुद को अच्छा महसूस करता है।

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आयुर्वेद के अनुसार ये भी बताया गया है कि भला किस व्यक्ति को कौन सा व्रत रखना चाहिए और कौन सा नहीं। तो चलिए आज जानते हैं सेहत को ध्यान में रखकर बताए गए व्रत नियमों के बारे में विस्तार से..

आयुर्वेद के अनुसार व्रत नियम

आयुर्वेद के मुताबिक जो लोग वात दोष से पीड़ित होते हैं, उन्हें हफ्ते में दो दिन से अधिक उपवास नहीं रखना चाहिए। इस दोष से पीड़ित लोगों को बहुत जल्द शरीर में कमजोरी और घबराहट महसूस होने लगती है। ऐसे में एक दिन से ज्यादा उपवास रखना इनके लिए नुकसानदयी साबित हो सकता है।

पित्त दोष वालों को भी 2 दिन से ज्यादा व्रत नहीं रखना चाहिए। इससे उन्हें गुस्सा और चक्कर आने की समस्या हो सकती है। साथ ही 2 दिन से अधिक भूखे रहने के कारण उनका बी.पी. भी लो रह सकता है।

कफ दोष वाले लोग लंबे समय तक उपवास रख सकते हैं। उपवास रखने से वे अच्‍छा महसूस करते हैं और उनका ध्यान भी बेहतर होता है।

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उपवास रखना एक अच्छी बात है, मगर कई बार मौसम की वजह से या फिर किसी और वजह कारण हो सकता है आपको व्रत के दौरान कुछ परेशानियों का सामना करना पड़े। ऐसे में जरुरी है आप अपना व्रत बंद कर दें। आज बात करेंगे व्रत के दौरान बॉडी में आने वाले बदलावों की ... जिनकी पहचान के बाद आपके लिए व्रत बंद कर देना ही बेहतर रहेगा।

पेट में दर्द या जलन

यदि व्रत के दौरान आपको पेट में जलन या दर्द महसूस हो तो बेहतर होगा आप उपवास बंद कर दें। ऐसा स्थिति में व्रत रखने से पेट में सूजन या फिर म्‍यूकोसा  जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

बेहोशी जैसा महसूस करना

अगर आपको व्रत के दौरान चक्कर, वॉमिट या फिर बेहोशी जैसा फील हो तो इसे शरीर में ग्लूकोज की कमी का संकेत समझें।चक्कर आना या फिर बेहोशी महसूस करना बॉडी में गैस्ट्रिक जलन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के लक्षण होते हैं। ऐसे में जरुरी है विधि अनुसार अपना व्रत खत्म कर दें।

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डायरिया

डायरिया जैसी समस्या अक्सर गलत खान-पान की वजह से होती है। मगर कई बार लंबे समय तक भोजन न करने की वजह से भी यह समस्या आपको हो सकती है। ऐसे में कोशिश करें हमेशा फलाहार व्रत ही करें, अगर आप फल नहीं खा सकते तो कम से कम व्रत के दौरान नारियल पानी का सेवन जरुर करें। ऐसा करने से आपको डायरिया जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पीरियड्स

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान उपवास नहीं करना चाहिए क्योंकि इस दौरान शरीर को एनर्जी की ज्‍यादा जरूरत होती है।ऐसे में यदि आप इस दौरान व्रत रखती हैं तो आपका वात दोष बिगड़ सकता है। ऐसे में कोशिश करें इस दौरान उपवास न हीं करें तो बेहतर है।

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इन सब सावधानियों के साथ व्रत पूरे होने के बाद भी कुछ सावधानियां बरतने की जरुरत होती है। जैसे कि...

उपवास खत्म करने का सही तरीका

लगातार व्रत के बाद आपका शरीर आराम की अवस्था में होता है। पेट की आंते एक तरह से सिकुड़ चुकी होती हैं। ऐसे में जरुरी है जब भी व्रत के बाद खाएं तो हमेशा हल्के खाने से ही शुरुआत करें। नारियल पानी और शहद व्रत तोड़ने के बाद सेवन के लिए सबसे बेहतरीन ऑपशन है। व्रत समाप्त होने के बाद कभी भी भारी चीज नहीं खानी चाहिए। ऐसा करने से आपको अपच और कब्ज जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

तो आगे से जब भी व्रत रखें तो इन बातों पर विशेष ध्यान दें। ताकि भगवान की कृपा के साथ-साथ आपकी सेहत भी बरकरार रहे। 


 

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