नारी डेस्क : महाशिवरात्रि 2026 का पावन पर्व इस बार 15 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की आराधना, व्रत, रात्रि जागरण और विशेष भोग अर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सही विधि से पूजा और शिव को प्रिय भोग अर्पित करने से सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को कौन-कौन से भोग चढ़ाने चाहिए, ताकि भोलेनाथ की कृपा जीवन पर बनी रहे।
महाशिवरात्रि में भोग का महत्व
भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, भगवान शिव भोग से ज्यादा भक्त की भावना और शुद्ध मन से प्रसन्न होते हैं। भोग अर्पण करना आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है और इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

महाशिवरात्रि 2026 के प्रमुख शिव भोग
पंचामृत भोग
पंचामृत को शिव पूजा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बनाया जाता है।
मान्यता है कि पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से स्वास्थ्य लाभ, मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति होती है।
दूध और गुड़ का भोग
दूध और गुड़ का भोग सरल होने के साथ अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह भोग घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और परिवार में शांति बनाए रखता है।

भांग और धतूरा
भांग और धतूरा भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय हैं। इन्हें अर्पित करने से शत्रु बाधा से मुक्ति और मानसिक तनाव में कमी आने की मान्यता है। उत्तर भारत के कई शिव मंदिरों में यह भोग विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।
खीर और फल
खीर का भोग चावल, दूध और शक्कर या गुड़ से तैयार किया जाता है। इसे अर्पित करने से घर-परिवार में समृद्धि और सौहार्द बना रहता है। साथ में मौसमी फल भी शिव को अर्पित किए जा सकते हैं।

बेर (फल)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बेर भगवान शिव के सरल और भोले स्वरूप का प्रतीक है। इसे चढ़ाने से जीवन में नई उम्मीदें और सकारात्मकता आती है।
भोग अर्पण करने की सरल विधि
पंचामृत की सभी सामग्रियों को स्वच्छ पात्र में मिलाएं
खीर को शुद्ध मन से बनाएं
भोग अर्पण करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
भोग के बाद उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
भक्तों के अनुभव
उज्जैन के एक श्रद्धालु के अनुसार, उन्होंने पिछले वर्ष महाशिवरात्रि पर खीर का भोग चढ़ाया था, जिसके बाद उनके व्यवसाय में अप्रत्याशित लाभ हुआ। वहीं एक गृहिणी का कहना है कि पंचामृत भोग से उनके घर का वातावरण शांतिपूर्ण हो गया। महाशिवरात्रि केवल व्रत या पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भगवान शिव से आत्मिक जुड़ाव का अवसर है। यदि श्रद्धा, विश्वास और सही भोग के साथ शिव की आराधना की जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव निश्चित रूप से देखने को मिलते हैं।