
नारी डेस्कः मायानगरी में बहुत सी किस्से कहानियां दफन है। बहुत से स्टार्स आए और अपनी ना मिटने वाली दास्तां लिख गए। ऐसी ही स्टोरी थी अपने समय के जुबली कुमार रहे राजेंद्र कुमार की जिन्होंने अपनी अलग ही पहचान बनाई लेकिन सुपरस्टार होने के बावजूद वह कंगाल हो गए थे। पैसों की ऐसी तंगी आई कि उन्हें अपना बंगला तक बेचना पड़ गया था और बंगला बेचते ही मानों उनकी किस्मत उनसे रूठ गई। अपना लक्की बंगला उन्हें राजेश खन्ना को बेचना पड़ा था और जब उन्होंने बंगला छोड़ा तो वह पूरी रात रोते ही रहे थे।
जुबली स्टार कहते थे फैंस
उनका पूरा नाम राजेंद्र कुमार तुली था। पिता कपड़े का बिजनेस करते थे। बंटवारे के बाद भी पिता ने कपड़े का बिजनेस शुरू किया और राजेंद्र को भी पुलिस विभाग में नौकरी मिल गई लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उनके एक दोस्त ने उन्हें मुंबई जाकर फिल्मों में बतौर एक्टर काम करने के लिए कहा और राजेंद्र भी 50 रु. लेकरमुंबई हीरो बनने के लिए निकल पड़े लेकिन फिल्मों में काम करने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा था। उस समय उनकी जेब में सिर्फ 50 रुपए थे जो उन्हें पिता से मिली घड़ी को बेचकर मिले थे। कड़ी मेहनत के बाद फिल्में मिलनी शुरू हुई लेकिन लेकिन कुमार की पहली लीड एकटर फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' हिट फिल्म बन गई इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा था। फैंस ने उन्हें 'जुबली कुमार' का नाम दिया क्योंकि उनकी फिल्में 25 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चलती रहती थीं।

बंगला बेचते ही बर्बाद हो गए थे राजेंद्र कुमार
लेकिन बावजूद पैसे की तंगी उनके जीवन में बहुत कुछ बदल गई। इस तंगी को दूर करने के लिए उन्हें अपना बंगला 'डिंपल' बेचना पड़ा था जो कि उन्होंने एक्टर भारत भूषण से 60 हजार रु. में खरीदा था। ब्रांदा के कार्टर रोड पर समुद्र किनारे बने इस बंगले को नया डिजाइन देकर उन्होंने इसका नाम अपनी बेटी 'डिंपल' के नाम पर रखा था। इस बंगले के आते ही राजेंद्र का करियर बुलंदियों पर पहुंच गया । इसी कारण वह इस बंगले को खुद के लिए लकी मानते थे। जब राजेश खन्ना को यह बात चली कि राजेंद्र कुमार इसे बेच रहे हैं तो उन्होंने इसे तुरंत खरीदने का फैसला कर लिया था। उन्होंने इसका नाम आशीर्वाद रखा और कहा जाता है कि ये बंगला उनके लिए भी काफी लकी साबित हुआ। बंगले में शिफ्ट होते ही उन्होंने एक के बाद एक 15 हिट फिल्में दी थी और अपनी जिंदगी के आखिरी साल उन्होंने यहीं गुजारे थे।

राजेश खन्ना को बंगला बेचकर खूब रोए
वहीं राजेंद्र ने जब ये लकी बंगला बेचा था तो वह गम में बहुत रोए थे। इसे बेचने के बाद राजेंद्र कुमार की हालत कंगाली जैसी हो गई थी। आखिर में 12 जुलाई 1999 को कैंसर के कारण मुंबई में राजेंद्र कुमार का निधन हो गया। राजेंद्र कुमार जिन्होंने लगभग 80 फिल्मों में अपना अभिनय दिखाया लेकिन आखिर वक्त में वह काफी दुख में रहे। फैंस उन्हें आज भी याद करते हैं। आपको हमारा ये पैकेज कैसा लगा हमें बताना ना भूलें।