नारी डेस्क: नवजात शिशुओं में जॉन्डिस (पीलिया) बहुत आम समस्या है। जन्म के बाद पहले कुछ हफ्तों में बच्चे की त्वचा और आंखों का रंग हल्का पीला हो जाता है। माता-पिता अक्सर इसके कारण चिंतित हो जाते हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में यह हानिरहित होता है और समय पर इलाज मिलने पर बच्चे जल्दी ठीक हो जाते हैं।
ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस क्या है?
ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस (Breast Milk Jaundice) एक ऐसा प्रकार का पीलिया है जो मां के दूध के कारण हो सकता है। यह अक्सर बच्चे के पहले और दूसरे हफ्ते में दिखाई देता है। जब नवजात बच्चे को पर्याप्त मात्रा में मां का दूध नहीं मिलता, तो बच्चे की आंतों में बिलीरुबिन का अवशोषण बढ़ जाता है। नवजात शिशु का लिवर पूरी तरह से विकसित नहीं होता, इसलिए खून में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। इसके कारण त्वचा और आंखों का रंग पीला दिखने लगता है।

क्या मां का दूध बंद करना चाहिए?
डॉक्टर इस स्थिति में स्तनपान बंद करने की सलाह नहीं देते, क्योंकि मां का दूध पोषण (Nutrition) देता है बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है यदि बिलीरुबिन का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाए, तो केवल सख्त मेडिकल देखरेख में अस्थायी रूप से स्तनपान पर रुकावट डाली जा सकती है।
ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस को कैसे रोका जा सकता है?
ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, क्योंकि यह मां के दूध की प्राकृतिक बनावट से जुड़ा है।
इसलिए रोकथाम की बजाय
पीलिया के मुख्य कारण की पहचान करना। और उसे सही तरीके से मैनेज करना ज्यादा जरूरी है।
नवजात शिशु में पीलिया का इलाज
फोटोथेरेपी (Phototherapy) सबसे आम और असरदार इलाज है
यह विशेष लाइट थेरेपी होती है। लाइट के असर से बिलीरुबिन ऐसे रूप में बदल जाता है जिसे बच्चा पेशाब और मल के जरिए आसानी से बाहर निकाल सकता है। यदि पीलिया बहुत गंभीर हो, तो बच्चे को एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता पड़ सकती है, जो बहुत ही कम मामलों में होती है। इसके अलावा कुछ बच्चों को आगे की जांच और इलाज की जरूरत हो सकती है, जिसमें शामिल हैं:
दवाएं
एंटीवायरल
फेनोबार्बिटोन (Phenobarbitone)
स्टेरॉयड
या सर्जरी

नवजात में पीलिया आम है और ज्यादातर हानिरहित होता है। ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस में स्तनपान जारी रखना सुरक्षित और लाभदायक है। सही समय पर इलाज मिलने पर बच्चे जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।