
नारी डेस्क: पारंपरिक भारतीय स्किनकेयर और कोरियन स्किनकेयर दोनों को दुनिया भर में सराहा जाता है, फिर भी वे बहुत अलग ब्यूटी फिलॉसफी से आते हैं। कोरियन स्किनकेयर आज की दुनिया में मॉडर्न एलिगेंस और इनोवेशन का प्रतीक है। मल्टी-स्टेप रूटीन, हल्के टेक्सचर, शीट मास्क और ग्लोइंग स्किन का कॉन्सेप्ट इसे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है। यह साइंस-बेस्ड फॉर्मूलों और नई टेक्नोलॉजी पर टिका है, जो तुरंत दिखने वाले रिज़ल्ट्स पर फोकस करता है।

भारतीय स्किनकेयर आयुर्वेद पर आधारित
वहीं दूसरी ओर पारंपरिक भारतीय स्किनकेयर सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि हीलिंग और वेलनेस की प्राचीन विरासत है। आयुर्वेद पर आधारित यह पद्धति त्वचा को शरीर, मन और आत्मा से जोड़कर देखती है। हल्दी, चंदन, नीम, एलोवेरा, गुलाबजल और तेल मालिश जैसे उपाय सदियों से चले आ रहे हैं, जो त्वचा को अंदर से संतुलित करते हैं।
गहराई से असर करता है भारतीय स्किनकेयर
जहां कोरियन स्किनकेयर “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” रूटीन की ओर जाता है, वहीं भारतीय स्किनकेयर पूरी तरह पर्सनलाइज़्ड होता है वात, पित्त और कफ जैसी शरीर की प्रकृति के अनुसार देखभाल। यह सिंपल लेकिन गहराई से असर करने वाला होता है, जिसमें कम प्रोडक्ट्स और ज़्यादा समझ शामिल होती है। सबसे खास बात यह है कि भारतीय स्किनकेयर में सोलफुल वेलनेस छिपी है। उबटन लगाना, तेल से मालिश करना या प्राकृतिक लेप लगाना सिर्फ स्किन के लिए नहीं, बल्कि मन को शांत करने और आत्म-देखभाल का अनुभव देता है।

दोनों में से कौन है ज्यादा फायदेमंद
कोरियन स्किनकेयर आधुनिक लाइफस्टाइल के लिए तेज़ और ट्रेंडी समाधान देता है, लेकिन पारंपरिक भारतीय स्किनकेयर एक प्राचीन लग्ज़री है जो हीलिंग, सादगी, पर्सनल केयर और आत्मिक संतुलन के साथ लंबे समय तक खूबसूरती बनाए रखता है। हालांकि दोनों परंपराएं फ़ायदेमंद हैं, लेकिन जो लोग हमेशा चमकदार, संपूर्ण और सच में टिकाऊ निखार चाहते हैं, उनके लिए पारंपरिक भारतीय स्किनकेयर अक्सर ज़्यादा फ़ायदेमंद विकल्प होता है।