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पॉलिटिक्स में रुचि न होने के बाद भी सोनिया क्यों बनी थी अध्यक्ष, जानिए

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 12 Aug, 2019 04:26 PM
पॉलिटिक्स में रुचि न होने के बाद भी सोनिया क्यों बनी थी अध्यक्ष, जानिए

गांधी परिवार की बहू इस समय देश की राजनीति की दिशा को तय करने वाली भी कड़ी है। एक समय था जब सोनिया गांधी राजनीति में नही आना चाहती थी, लेकिन आज वह राजनीति व पार्टी के लिए बहुत ही अहम है। राजीव गांधी की मृत्यु के बाद सोनिया ने केवल अपने परिवार को बल्कि अपनी पार्टी को भी ही अच्छे ढंग से संभाला  है। अपनी राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने के लिए एक बार दोबारा वह फिर आगे आ गई है। कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी को दोबारा अपनी अध्यक्ष चुन लिया गया है। वह तब तक इस पद पर रहेगी जब तक पार्टी को अपना अगला अध्यक्ष नही मिल जाता है। इससे पहले भी सोनिया ने पार्टी की अध्यक्ष रहते हुए 2004 व 2009 में जीत दिलवाई थी। 

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राजीव के मृत्यु के बाद सोनिया पर पड़ा था प्रेशर 

21 मई 1991 को बम धमाके में राजीव गांधी की मौत के बात सोनिया गांधी पर पार्टी में पद को संभालने पर काफी प्रेशर बन रहा था। राजीव गांधी की हत्या के बाद एक तरफ पूरा देश हिल चुका था वहीं दूसरी तरफ सोनिया को अस्थमा का दौरा पड़ गया था। तब 19 साल की प्रियंका ने उसे संभाला। 24 मई 1991 को न्यूयॉर्क टाइम्स में छापी गई रिपोर्ट के अनुसार सोनिया ने कहा था कि "कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा मुझ पर जो भरोसा जताया गया है, उससे मैं अभिभूत हूं. लेकिन, मेरे बच्चों और मुझ पर जो विपदा आई है, उसकी वजह से कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षता स्वीकार करना मेरे लिए संभव नहीं है। पंडित जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, और मेरी स्वर्गीय पति ने पार्टी और देश के लिए अपना जीवन लगा दिया। मुझे यकीन है कि उनकी यादें, और उनके साथ-साथ अनगिनत कांग्रेसी पुरुषों और महिलाओं का त्याग आज कांग्रेस को और भी ज्यादा मज़बूत से लौटने का साहस प्रदान करेगा"। यह कह कर उन्होंने पद को त्याग दिया तब पीवी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री के पद के लिए चुना गया। उनका कहना था कि वह कभी भी राजनीति के सफर में अपने कदम नही रखेंगी।

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पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण 1998 में संभाली कमान 

1998 में पार्टी की ओर से सोनिया गांधी को कमान संभालने के लिए कहा गया क्योंकि 1996, 98  में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा था। तब सोनिया गांधी ने अपने बात को भूलते हुए राजनीति के सफर में कदम रखा था। तब 14 मार्च 1998 में सोनिया गांधी को कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष के पद पर चुना गया था। इसके बाद लगातार 19 साल तक वह इस पद पर काम करती रही। सोनिया 1999 में अमेठी सीट से पहली बार लोकसभा पहुंची थीं, मगर 2004 में उन्होंने अमेठी सीट अपने पुत्र राहुल गांधी के लिए छोडक़र रायबरेली से चुनाव लड़ा था।

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2004 में दोबारा सत्ता में आई पार्टी 

2004 में पार्टी आने से पहले सोनिया गांधी ने कांग्रेस के साथ- साथ जनता की नजरों में अपनी जगह को काफी मजबूत कर लिया था। उसके बाद वह पूरे जोश के साथ 2004 में कमबैक करते हुए कांग्रेस सत्ता में वापिस आई। सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के बाद पहली बार कांग्रेस चारों राज्यों में सिमटी हुई थी। इतना ही नही मध्यप्रदेश, ओडिशा, नागालैंड व मिजोरम लोकसभा में कांग्रेस के 141 सांसद थे। 


 

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