
नारी डेस्क: आजकल डिटॉक्स जूस, सूप क्लेंज और महंगे प्लान्स का चलन है, लेकिन सच यह है कि खिचड़ी इन सभी ट्रेंड्स से कहीं ज़्यादा असरदार, सुरक्षित और संतुलित है। खिचड़ी = चावल + दाल दोनों मिलकर Complete Protein बनाते हैं, यह हल्की, नरम और आसानी से पचने वाली होती है। बीमार होने पर डॉक्टर सबसे पहले खिचड़ी ही सुझाते हैं। चलिए जानते हैं इसके और भी फायदे।
नेचुरल डिटॉक्स का काम करती है खिचड़ी
शरीर का डिटॉक्स काम लिवर और किडनी खुद करते हैं। खिचड़ी इन अंगों पर बोझ नहीं डालती कम मसाले और हल्का भोजन अंगों को आराम देती है। यही असली डिटॉक्स है, जूस नहीं। आयुर्वेद में खिचड़ी को “त्रिदोष संतुलक” माना गया है वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित करती है। पंचकर्म के दौरान भी खिचड़ी दी जाती है। इसका मतलब शरीर और मन दोनों को शांति
आंतों को आराम देती है
हल्की होने के कारण यह आंतों की सूजन कम करती है। दस्त, कब्ज या पेट दर्द में लाभकारी है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है, कमजोरी नहीं आती। डिटॉक्स डाइट की तरह शरीर को थकाती नहीं। यह बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए आदर्श है। ऑपरेशन या बुखार के बाद रिकवरी में मददगार है।
पाचन के लिए खिचड़ी को और फायदेमंद कैसे बनाएं?
थोड़ा घी डालें इसमं पाचन सुधरता है। जीरा, हींग, हल्दी का तड़का लगाएं। साथ में दही या छाछ (अगर सूट करे)। खिचड़ी सिर्फ साधारण खाना नहीं, बल्कि पाचन तंत्र के लिए प्राकृतिक औषधि है। रोज़ाना या हफ्ते में 1–2 बार खिचड़ी खाना पेट को स्वस्थ रखने का आसान तरीका है।