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विश्व स्तनपान दिवसः स्तनपान करवाने वाली मांओं में कम होता हैं डायबिटीज का खतरा

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 02 Aug, 2019 12:04 PM
विश्व स्तनपान दिवसः स्तनपान करवाने वाली मांओं में कम होता हैं डायबिटीज का खतरा

नए जन्मे बच्चे के लिए मां का दूध बहुत ही जरुरी होता है। यह न केवल उनके पोषण के लिए बल्कि उन्हें कई तरह की बीमारियों से भी बचाता है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ ) के अनुसार दुनिया में हर 5 में से 3 नए जन्में बच्चों को पहले घंटे में मां का पहला पीला दूध नही मिल पाता है। वहीं भारत में इससे संबंधित 40 फीसदी के पाए जाते है। दुनिया में हर साल 8 लाख मौते सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग न होने के कारण हो रही है जिसमें सबसे ज्यादा 6 महीने से कम उम्र के बच्चे शामिल है। दुनिया भर में इसी तरह के केस में कमी लाने के लिए हर साल 120 देशों में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। जिसमें नई बनी मांओं को ब्रेस्टफीडिंग के महत्व के बारे में बताया जाता है। इसके साथ ही उन्हें इनसे जोड़े कई तरह के भ्रम को दूर कर एक हेल्दी लाइफ स्टाइल के लिए प्रेरित किया जाता है। 

 

बच्चे व मां के लिए क्यों जरुरी है स्तनपान 

नवजात बच्चे के लिए जितना जरुरी मां का दूध होता है उतना ही जरुरी एक मां के लिए ब्रेस्टफीडिंग करवाना होता है। यह न केवल बच्चे बल्कि दोनों के लिए जरुरी होता है। ब्रेस्ट की साइज के कारण ब्रेस्ट फीडिंग पर कोई असर नही पड़ता है। इसके साथ ही फीड करवाने से ब्रेस्ट की साइज भी नही बिगड़ता है। आईए जानते  है ब्रेस्टफीडिंग का क्या महत्व है। 

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बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता 

बच्चे के जन्म के बाद निकलने वाला मां क पहला पीला दूध कोलोस्ट्रम कहलाता है। जो कि प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम से भरपूर होता है। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। इतना ही नही ब्रेस्टफीडिंग करवाने से मां में ब्रेस्ट-ओवेरियन कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज, दिल के रोगों का खतरा भी कम होता है। 

बर्न होती है मां की कैलोरी 

ब्रेस्ट फीडिंग कराने से मां की कैलोरी काफी ज्यादा बर्न होती है। जिससे मां डिलीवरी के बाद अपने बढ़े हुए वजन को आसानी से कम कर सकती है। इतना ही नही इस दौरान शरीर से निकलने वाले ऑक्सीटोसिन तनाव को कम करने में मदद करते है। 

दो साल तक करवा सकते है स्तनपान

डब्ल्यूएचओ के अनुसार बच्चे को जन्म के पहले घंटे से लेकर 6 महीने तक स्तनपान करवाना जरुरी होता है। 6 महीने के बाद उन्हें दूध के साथ दाल का पानी, केला, जूस दे सकते है। दो साल तक मां बच्चों को अपना दूध पीला सकती है। एक बार जब स्तनपान करवाते है 10 से 15 मिनट तक करवाना चाहिए, वहीं शुरु में दिन में तीन से चार बार करवाना चाहिए। 

रखे साफ सफाई का ध्यान

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बच्चे व मां दोनों की साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। फीड देने से पहले व बाद में निप्पल को कॉटन के कपड़े से साफ करना चाहिए। बच्चों को अच्छे से कवर करना चाहिए। फीड करवाते समय आरामदायक स्थिति में बैठे जिससे आपको किसी भी तरह की दिक्कत न हो। 

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डाइट में करें बदलाव 

जब आप बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा रहे है तो अपनी डाइट में बदलाव करें। डाइट में तला हुए खाने की जगह जूस, दूध, लस्सी, नारियल पानी, दाल, फलियां, सूखे मेवे, हरी पत्तेदार सब्जियां, दही, पनीर, टमाटर को अधिक से अधिक शामिल करे। खाने में लाइट व हेल्दी खाना लें। 

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ऐसे में न करवाएं बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग 

अगर मां एचआईवी पॉजिटिव, टीबी की मरीज या कैंसर के इलाज में कीमोथैरेपी ले रही है तो ब्रेस्टफीडिंग नहीं करानी चाहिए। वहीं नवजात में गैलेक्टोसीमिया बीमारी पाई गई है तो मां को दूध नहीं पिलाना चाहिए। इस बीमारी में बच्चा दूध में मौजूद शुगर को पचा नहीं पाता है। इसके अलावा अगर माइग्रेन, पार्किंसन या आर्थराइटिस जैसे रोगों की दवा पहले से ले रही हैं तो डॉक्टर को जरूर बताएं। 

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