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अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखने की मनाही : जानें कारण और महत्व

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 29 Aug, 2025 06:28 PM
अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखने की मनाही : जानें कारण और महत्व

नारी डेस्क : हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा का सफर और उसके अंतिम संस्कार से जुड़ी मान्यताएं बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि अंतिम संस्कार के बाद लोग पीछे मुड़कर नहीं देखते। क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या वजह है?

मृत्यु और अंतिम संस्कार का महत्व

जैसा कि गुरुड़ पुराण में बताया गया है, जब कोई व्यक्ति इस दुनिया से चला जाता है, तो उसकी आत्मा शरीर छोड़ देती है। श्मशान घाट वह अंतिम स्थान होता है जहां व्यक्ति का शरीर अग्नि में भस्म होकर पंचतत्व में विलीन हो जाता है। हिंदू धर्म में दाह संस्कार इसलिए जरूरी माना गया है ताकि आत्मा अपने अगले जीवन की ओर जा सके चाहे वह स्वर्ग हो, नर्क या फिर पुनर्जन्म।

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क्यों मना है पीछे मुड़कर देखना?

अंतिम संस्कार के समय परिवार के लोग गहरे भावुक होते हैं। उन्हें अपनों से बिछड़ने का दर्द होता है। ऐसे में यदि कोई पीछे मुड़कर देखता है, तो माना जाता है कि मृतक की आत्मा भी मोह वश पीछे लौटने की इच्छा रखने लगती है। भगवान कृष्ण ने भगवद गीता में कहा है कि आत्मा अमर, अविनाशी और अजर है। शरीर भस्म हो जाता है, लेकिन आत्मा का अस्तित्व रहता है। अंतिम संस्कार के समय यदि लोग पीछे मुड़कर देखते हैं, तो मृतक की आत्मा अपने बंधन से मुक्त होकर परलोक की यात्रा पूरी नहीं कर पाती। इसलिए शास्त्रों में इसे मना किया गया है।

13 दिन की पूजा और आत्मा की शांति

गुरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को 'प्रेत' कहा जाता है। यह आत्मा 10 दिनों तक अपने घर और परिचित स्थानों पर मंडराती रहती है। परिवार और पंडित इन दिनों में मृतक के लिए सभी आवश्यक कर्मकांड और रीतियां पूरी करते हैं। इन 13 दिनों तक किए जाने वाले संस्कार और पूजा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आत्मा पूरी तरह से शांति पाए और अपने अगले जीवन या स्वर्ग की ओर बढ़ सके।

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अंतिम संस्कार के समय पीछे मुड़कर न देखने की परंपरा केवल एक धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि यह मृतक की आत्मा को बंधन मुक्त करके शांति दिलाने और उसके अगले जीवन की यात्रा सुचारू बनाने का एक तरीका है।

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