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डिलीवरी के बाद भारतीय महिलाओं के मोटे होने के 6 कारण

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 10 Feb, 2020 05:08 PM
डिलीवरी के बाद भारतीय महिलाओं के मोटे होने के 6 कारण

मां बनना हर औरत के लिए सौभाग्य की बात है। कंसीव करते ही महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव आने शुरू हो जाते है, जोकि नैचुरल प्रोसेस है। वहीं डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें से एक है मोटापा।

10 में से 6 महिलाएं बच्चा पैदा करने के बाद मोटी हो जाती है। महिलाएं लाख कोशिश करने के बाद भी डिलीवरी के बाद पहले जैसी स्लिम नहीं हो पाती। यही नहीं, कुछ महिलाओं का वजन तो और भी बढ़ जाता है, खासकर ऐसा भारतीय महिलाओं के साथ होता है। इसका एक कारण कहीं ना कहीं आपकी लापरवाही भी है।

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चलिए आज हम आपको बताते हैं कि डिलीवरी के बाद आप वजन क्यों नहीं कर पाती...

डिलीवरी के बाद वजन कम ना होने की एक वजह आपकी खान-पान की गलत आदतें भी है। बेवक्त खाना या एकदम ज्यादा खा लेना मोटापे की सबसे बड़ी वजह है। अगर आप भी वेट लूज करना चाहती हैं तो समय पर खाएं और डाइट में फल व सब्जियां लें।
. प्रेग्नेंसी के बाद शरीर कमजोर पड़ जाता है, जिसकी वजह से महिलाएं फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा नहीं कर पाती, जो वजन बढ़ने का कारण बनता है।
. कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के बाद तनाव व पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सामना भी करना पड़ता है। यह भी वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।
. हाइपोथायरॉयड बीमारी भी प्रेगनेंसी के बाद वजन बढ़ने का कारण है।
. सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाएं भी मोटी हो जाती है।
. अगर डिलीवरी के बाद पीरियड्स अनियमित हो जाए तो भी वजन बढ़ने लगता है।

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वजन कम करना चाहती हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

ब्रेस्टफीडिंग जरूर करवाएं

बच्चे को स्तनपान जरूर करवाएं। बता दें कि स्तनपान के दौरान महिला का शरीर करीब 500 कैलोरी खर्च करता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।

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भरपूर नींद और स्ट्रेस से बचें

महिलाएं किसी तरह का स्ट्रैस ना लें और कम से कम आठ घंटे सोएं। इसके अलावा बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार की दवा ना लें।

हल्की-फुल्की एक्सरसाइज

धीरे-धीरे चलना फिरना शुरू करें, हलकी एक्सराइज करें जिससे शरीर पर ज्यादा जोर ना पड़े। पेट कम करने के लिए आप अनुलोम-विलोम, उठक-बैठक, पेट के निचले हिस्से की एक्सरसाइज कर सकती हैं। 

डाइट में लें ये चीजें

बहुत सी महिलाओं को इस दौरान कब्ज की समस्या भी रहती हैं इसलिए फाइबर व प्रोटीन युक्त चीजें खाएं। साथ ही डाइट में दलिया, हरी सब्जियां, फल, दालें, दूध, दही, सूखे मेवे, अंडा व मांस-मछली खाएं। खून की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन व फोलिक एसिड से भरपूर भोजन जैसे पालक, मेथी, अंजीर आदि खाएं।

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घरेलू नुस्खे

. सुबह खाली पेट गर्म पानी या उसमें नींबू व शहद मिलाकर पीएं।
. नाश्ते में 1 कप ग्रीन टी लें। दिनभर में 2-3 कप ग्रीन टी पीएं।
. सौंफ-अजवाइन का गर्म पानी पीना है।
. 8-10 गिलास पानी, नारियल पानी, सौंफ का पानी, फलों का जूस आदि लें।
. 1 चम्मच मेथी के बीजों को 1 गिलास पानी में उबालें और हल्का गुनगुना होने पर पीएं। इससे वजन भी कम होगा और हार्मोन्स भी संतुलित रहेंगे।
. पेट को किसी गर्म कपड़े या बेल्ट की मदद से लपेट कर रखें। इससे वेट लूज के साथ गर्भावस्था के बाद पीठ के दर्द में भी आराम मिलता है।
. दालचीनी और लौंग का काढ़ा बनाकर पीएं।

क्या ना खाएं?

. गैस बनाने वाली चीजें जैसे गोभी
. खट्टी, तली, मसालेदार चीजें ना खाएं
. कॉफी व चॉकलेट कम खाएं।
. कोल्डड्रिंक व सोडा ना पियें।
. शराब-सिगरेट से दूरी बनाएं

नार्मल डिलीवरी में वापिस शेप में आने के लिए 4 से 6 हफ्ते का समय लग सकता है जबकि सिजेरियन में 4 से 6 महीने में औरतें परफेक्ट शेप में आ सकती हैं। ऐसे में घबराएं नहीं और ना ही हिम्मत छोड़ें बल्कि अपने लाइफस्टाइल को सही रखें।

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