
ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को खोलने की तैयारी चल रही है। करीब चार दशक बाद, रत्न भंडार का दरवाजा खोला जाएगा. आखिरी बार इसका दरवाजा 1985 में खुला था लेकिन तब सिर्फ मरम्मत की गई थी। राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 14 जुलाई को खुलने की संभावना है।

मंदिर प्रबंध समिति ने मंदिर के रत्न भंडार को 14 जुलाई को खोलने के लिए ओडिशा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के चुनाव अभियान के दौरान वादा किया था कि अगर ओडिशा में उनकी पार्टी सत्ता में आयी तो वह मंदिर के भीतर रत्न भंडार में संग्रहीत आभूषणों की सूची बनाने के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को खोलेगी, जिसे 1978 से नहीं खोला गया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने लंबे समय से बंद रत्न भंडार की बाहरी दीवार की जांच करने के बाद राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन को मरम्मत करने के लिए इसे खोलने का सुझाव दिया था। मान्यता है कि रत्ना भंडार की सुरक्षा किंग कोबरा जैसे विषधारी करते हैं। एक सेवक ने कहा कि हम सभी प्राचीन मंदिर से निकले वाले रत्न भंडार को लेकर जिज्ञासु हैं लेकिन साथ ही वहां पर सांपों की संभावना को देखते हुए भयभीत भी हैं।

उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 2018 में भीतर रत्न भंडार की मरम्मत करने और उसे खोलने का निर्देश दिया था जिसके बाद, मंदिर प्रशासन ने इस पर अमल किया लेकिन कोषागार की चाबी गायब होने के कारण खोलने में असफल रहे। बताया जा रहा है कि अगर डुप्लीकेट चाबी काम नहीं करेगी तो ताला तोड़कर रत्न भंडार को खोला जाएगा। आभूषणों की लिस्ट बनाने और रत्न भंडार की मरम्मत के लिए आवश्यक एसओपी पर भी चर्चा की जा रही है।

जगन्नाथ मंदिर का यह रत्न भंडार दो भागों में बंटा हुआ है, भीतर भंडार और बाहर भंडार.बाहरी भंडार में भगवान को अक्सर पहनाए जाने वाले जेवरात रखे जाते हैं. वहीं जो जेवरात उपयोग में नहीं लाए जाते हैं, उन्हें भीतरी भंडार में रखा जाता है. रत्न भंडार का बाहरी हिस्सा अभी भी खुला है लेकिन भीतरी भंडार की चाबी पिछले छह साल से गायब है। रत्न भंडार को अंतिम बार 14 जुलाई 1985 में खोला गया था और उसमें रखे जेवरात की सूची बनाई गई थी