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Google सर्च ने बचाई 6 साल बच्चे की जान, मां ने ढूंढा इलाज, डॉक्टरों ने दे दिया था जवाब

  • Edited By Monika,
  • Updated: 18 Sep, 2025 01:35 PM
Google सर्च ने बचाई 6 साल बच्चे की जान, मां ने ढूंढा इलाज, डॉक्टरों ने दे दिया था जवाब

नारी डेस्क : गूगल एक ऐसा सर्च इंजन है जो हमें हर तरह की जानकारी खोजने में मदद करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गूगल किसी की जान भी बचा सकता है? अमेरिका में ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया हुआ, जहां गूगल की मदद से एक बच्चे की जिंदगी बचाई गई।

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अमेरिका के टेक्सास राज्य में रहने वाले 6 साल के विटेन डेनियल की अचानक तबीयत बहुत खराब हो गई। शुरू-शुरू में उसे सिरदर्द और चक्कर आने की शिकायत थी, इसलिए उसे अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने शुरुआत में इसे फ्लू माना और उसका इलाज शुरू किया। लेकिन 24 घंटे के भीतर विटेन की हालत बेहद बिगड़ गई। वह बोलना, चलना और यहां तक कि खुद से सांस लेना भी बंद कर दिया। उसे तुरंत वेंटिलेटर पर डाल दिया गया।

डॉक्टरों ने कई टेस्ट किए और पता चला कि विटेन को फ्लू नहीं बल्कि ब्रेनस्टेम में खून रिसने की समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में 'कैवर्नस मालफॉर्मेशन' (Cavernous Malformation) कहा जाता है। यह एक दुर्लभ बीमारी है जिसमें दिमाग की खून की नसों का एक असामान्य समूह फट जाता है। बच्चे को बार-बार स्ट्रोक और दौरे आने लगे।

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डॉक्टरों ने परिवार को चेतावनी दी कि अगर विटेन बच भी गया, तो शायद वह फिर कभी चल-फिर नहीं पाएगा और उसे जीवन भर वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब की जरूरत होगी। परिवार बहुत निराश हो गया, लेकिन विटेन की मां, केसी डेनियल ने उम्मीद नहीं छोड़ी।

गूगल ने बदल दी किस्मत

उन्होंने आधी रात को गूगल पर अपने बेटे की बीमारी के बारे में खोजबीन शुरू की। खोज के दौरान उन्हें ह्यूस्टन स्थित यूटीहेल्थ हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. जाक मोर्कोस का लेख मिला। डॉ. मोर्कोस इस दुर्लभ बीमारी के विशेषज्ञ थे। केसी ने डॉक्टर को तुरंत ईमेल करके मदद मांगी। डॉक्टर ने तुरंत जवाब दिया और विटेन को ह्यूस्टन के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार घंटे की एक जटिल सर्जरी की। यह सर्जरी सफल रही और कुछ ही घंटों में विटेन ने फिर से सांस लेना और बोलना शुरू कर दिया।

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यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे गूगल की मदद और मां की हिम्मत ने एक बच्चे की जान बचाई। साथ ही यह भी कि सही जानकारी और विशेषज्ञ सलाह कितनी अहम होती है, खासकर जब बीमारी दुर्लभ और गंभीर हो।
 

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