25 MARWEDNESDAY2026 3:46:36 PM
Nari

रामनवमी 2026: भगवान राम को कौनसा भोग है सबसे प्रिय और कैसे तैयार करें प्रमुख प्रसाद

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 25 Mar, 2026 02:16 PM
रामनवमी 2026: भगवान राम को कौनसा भोग है सबसे प्रिय और कैसे तैयार करें प्रमुख प्रसाद

नारी डेस्क:  रामनवमी का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पावन और आनंदमय माना जाता है। 2026 में यह पर्व 26 मार्च को पड़ रहा है, जबकि अयोध्या में 27 मार्च को विशेष उत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस दिन घर-घर में पूजा और भोग की तैयारी होती है, जो केवल भोजन नहीं बल्कि श्रद्धा और आस्था का प्रतीक होती है। भगवान श्रीराम को अर्पित किए जाने वाले भोग में सात्विकता और शुद्धता का विशेष महत्व होता है।

धनिया पंजिरी – ठंडक और मिठास का संगम

रामनवमी पर धनिया पंजिरी का विशेष महत्व है। इसे पिसे हुए सूखे धनिये, घी, चीनी और मेवों से बनाया जाता है। यह गर्मी के मौसम की शुरुआत में शरीर को ठंडक देने के लिए बनाया जाता है। कई घरों में इसे तैयार करते समय बच्चों को भी शामिल किया जाता है, जिससे त्योहार का उत्साह और बढ़ जाता है।

PunjabKesari

पंचामृत – भगवान श्रीराम का आवश्यक भोग

पंचामृत वैष्णव पूजा का अभिन्न हिस्सा है। यह दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बनाया जाता है। इसे तैयार करते समय तुलसी के पत्ते डालना अनिवार्य होता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान श्रीराम भोग स्वीकार नहीं करते।

केसरिया भात – शुभता और ज्ञान का प्रतीक

केसरिया भात पीले रंग के मीठे चावल होते हैं, जिन्हें केसर, इलायची और सूखे मेवों के साथ बनाया जाता है। इसे भगवान राम को अत्यंत प्रिय माना जाता है और कई परिवार इसे सुबह के भोग में शामिल करते हैं। यह व्यंजन शुभता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

ये भी पढ़ें:  कामदा एकादशी 2026 कब है ,जानें तारीख और पारण का समय

खीर और पूरी – पारंपरिक पसंद

खीर और पूरी रामनवमी का पारंपरिक भोग है। खीर दूध और चावल से बनाई जाती है और इसे अमृत समान माना जाता है। कहा जाता है कि राजा दशरथ के यज्ञ के बाद जो प्रसाद मिला था, वह खीर ही थी। पूरी के साथ इसका संयोजन भोग को और पूर्ण बनाता है।

PunjabKesari

कंदमूल और फल – वनवास की याद दिलाते हैं

भगवान श्रीराम के वनवास के जीवन की याद में कंदमूल और फल अर्पित किए जाते हैं। इसमें शकरकंद, केला, सेब और बेर शामिल होते हैं। खासकर बेर का प्रसाद शबरी की भक्ति की याद दिलाता है। यह परंपरा हमें सादगी और संतोष का संदेश देती है।

पना और शीतल पेय – स्वास्थ्य का ध्यान

चैत्र मास में गर्मी की शुरुआत हो जाती है, इसलिए भगवान को बेल का शरबत या आम का पना अर्पित किया जाता है। यह न केवल परंपरा है बल्कि मौसम के अनुसार स्वास्थ्य का ध्यान रखने का तरीका भी है। रामनवमी का भोग केवल भोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सादगी और सात्विकता का प्रतीक है। धनिया पंजिरी, पंचामृत, केसरिया भात, खीर-पूरी, कंदमूल, फल और शीतल पेय इन सभी भोगों को भगवान राम को अर्पित करके परिवार में एक धार्मिक और खुशहाल माहौल बनता है।
 

Related News