
नारी डेस्क: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर Shri Mahakaleshwar Temple में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। तड़के सुबह से ही श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर बाबा महाकाल के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा और माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।
भस्म आरती में दिखा बाबा का दिव्य स्वरूप
सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद पंचामृत अभिषेक के साथ बाबा का विशेष पूजन किया गया। इसके बाद आम के रस से अभिषेक कर बाबा को भस्म से सजाया गया। भस्म आरती के दौरान भगवान शिव को भांग, भस्म और शेषनाग से अलंकृत कर उनका अद्भुत श्रृंगार किया गया। शंख और ढोल-नगाड़ों की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने इस दिव्य रूप के दर्शन किए।

माथे पर शेषनाग का विशेष श्रृंगार
अक्षय तृतीया के खास मौके पर बाबा महाकाल के माथे पर शेषनाग को सजाया गया, जो भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था। माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल अक्षय होता है, यानी कभी समाप्त नहीं होता।
बदले भस्म आरती के नियम
बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती में शामिल होने के नियमों में बदलाव किया है। अब श्रद्धालुओं को एक दिन पहले ऑनलाइन बुकिंग कराना अनिवार्य होगा। पहले जहां मंदिर के काउंटर से पंजीकरण होता था, अब सुविधा को डिजिटल कर दिया गया है, जिससे व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
अक्षय तृतीया के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। मंदिर परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और बैरिकेडिंग के साथ डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की गई, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
Akshaya Tritiya का दिन बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत भी करते हैं।
