नारी डेस्क: जब हम किसी खूबसूरत घर में प्रवेश करते हैं, तो वह केवल महंगे सोफे, पेंट या सजावट की वजह से अच्छा नहीं लगता। असली कमाल उस पर पड़ने वाली सही रोशनी का होता है। इंटीरियर डिजाइन में लाइटिंग सिर्फ अंधेरा दूर करने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक कला है जो घर को शांत, खुशहाल, आरामदायक या आलीशान बना सकती है। एक इंटीरियर डिज़ाइनर के रूप में मेरा अनुभव है कि सही लाइटिंग साधारण घर को भी शानदार बना देती है।
लाइटिंग के तीन जरूरी आधार (Layering)
किसी भी कमरे को बेहतरीन दिखाने के लिए रोशनी की परतें बनाना जरूरी है।
एम्बिएंट लाइट – पूरे कमरे की सामान्य रोशनी (सीलिंग लाइट, झूमर)
टास्क लाइट – खास काम के लिए (पढ़ाई, खाना बनाना)
एक्सेंट लाइट – सजावट या पेंटिंग को उभारने के लिए
इन तीनों का सही मेल घर को प्रोफेशनल डिजाइन जैसा लुक देता है।

रोशनी का मूड और सेहत पर असर
पीली रोशनी मन को सुकून देती है, इसलिए बेडरूम में अच्छी लगती है।
सफेद रोशनी हमें सजग रखती है, इसलिए किचन, स्टडी या काम की जगह पर सही रहती है।
डिज़ाइनर की सलाह
नेचुरल लाइट का सम्मान करें
दिन में सूरज की रोशनी आने दें। हल्के रंग के पर्दे लगाएँ।
इससे बिजली भी बचेगी और घर में सकारात्मकता बढ़ेगी।
मिरर का कमाल
छोटे कमरे में खिड़की के सामने शीशा लगा दें।
रोशनी परावर्तित होकर कमरा बड़ा और चमकदार लगेगा।
डिमर का इस्तेमाल
हर समय तेज रोशनी की जरूरत नहीं होती।
डिनर, पूजा, मेहमान या आराम – हर समय जरूरत के अनुसार रोशनी कम-ज्यादा की जा सके।
कोव लाइट
छत के किनारों में छिपी रोशनी घर को आधुनिकता के साथ भव्यता का अहसास कराती है।
आँखों पर सीधी चमक भी नहीं पड़ती।

कमरे के अनुसार आसान लाइटिंग गाइड
बेडरूम → हल्की पीली, सुकून देने वाली। बेड के दोनों तरफ लैंप रखें।
किचन → तेज सफेद रोशनी। प्लेटफॉर्म पर परछाईं नहीं पड़ना चाहिए।
लिविंग रूम → अलग-अलग रोशनियों का मेल रखें।
बाथरूम → आईने के पास अच्छी रोशनी रखें, जिससे सजना-संवरना सुविधाजनक हो।
एक आम गलती जो लोग करते हैं
ज्यादातर घरों में लोग सिर्फ एक ट्यूब लाइट या एक ही रोशनी पर निर्भर रहते हैं।
इससे घर फीका लगने लगता है।

जब मेहमान कहें “घर बहुत सुंदर लग रहा है”,
तो समझिए रोशनी ने अपना काम कर दिया।
लेखक: रक्षा सेठी, इंटीरियर डिज़ाइनर एवं वास्तु विशेषज्ञ इंदौर