19 OCTSATURDAY2019 8:27:27 AM
Nari

बल्जिंग डिस्क बीमारी की शिकार हुई अनुष्का, शुरूआती लक्षणों को इग्नोर करना पड़ता है भारी

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 21 May, 2019 11:35 AM
बल्जिंग डिस्क बीमारी की शिकार हुई अनुष्का, शुरूआती लक्षणों को इग्नोर करना पड़ता है भारी

बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का की हाल ही में कुछ फोटो वायरल हुई, जिसमें वो फिजियोथैरेपी क्लीनिक में जाती नजर आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुष्का लंबे अर्से से बल्जिंग डिस्क नामक बीमारी से परेशान है लेकिन आजकल यह समस्या ज्यादा हो गई है, जिसका इलाज कराने वो फिजियोथेरिपिस्ट के पास पहुंची। अब आप सोच रहे होंगे कि बल्जिंग डिस्क की समस्या आखिर है क्या। तो चलिए आज हम आपको इस बीमारी के कारण, लक्षण और इलाज बताते हैं, जिससे आप समय रहते इससे बचाव कर सकते हैं।

 

क्या है बल्‍जिंग डिस्‍क?

बल्‍जिंग डिस्‍क को हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc) भी कहा जाता है, जो खराब जीवनशैली के चलते तेज से उभर कर सामने आ रही है। बल्जिंग डिस्क के चलते कूल्हों और जांघों में दर्द होने लगता है। साथ ही इससे शरीर के नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है।

PunjabKesari

कब होती है बल्जिंग डिस्क की समस्या?

बल्जिंग डिस्क की समस्या तब होती है जब डिस्क का कठोर कार्टिलेज उभर जाता है या उसमें सूजन आ जाती है। यह उभार कार्टिलेज के चारों तरफ बराबर होती है लेकिन सूजन उस घेरे की चौथाई या आधे से कम होती है। पूरा दिन बैठकर काम करने, कम शारीरि‍क व्यायाम करने वाले लोग इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं। अगर आप एक्सरसाइज, स्विमिंग या क‍िसी भी तरह की फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं तो भी आपको बल्जिंग डिस्क हो सकता है।

कैसे करती है असर?

बल्‍जिंग डिस्‍क शरीर पर 2 तरह से असर करती है। पहले लोअर बैक में यह समस्या होने पर हिप्स व जांघों में दर्द होता है। दूसरी तरह के बल्‍जिंग डिस्‍क में गर्दन प्रभाव‍ित होती है, जिससे कंधों और हाथों में दर्द होने लगता है।

बीमारी के लक्षण

-कमर में दर्द रहना
-सोते समय करवट बदलते हुए तेज दर्द महसूस होना
-चलने-फिरने में परेशानी होना
-मांसपेश‍ियों में कमजोरी महसूस होना
-शरीर या कमर के भाग का बार-बार सुन्न होना
-हाथों-पैरों का सुन्न होना या झुनझनाहट
-हाथों और पैरों में दर्द रहना
-मांसपेशियों में कमजोरी

PunjabKesari

क्या है बल्जिंग डिस्क का इलाज

जैसा क‍ि अनुष्का शर्मा के डॉक्टर्स ने उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी है, जिससे यह तो साफ है क‍ि इस रोग में आराम की बहुत जरूरत है। वैसे बल्जिंग डिस्क का इलाज फीजियोथेरेपी द्वारा कि‍या जा सकता है। इससे आपकी मांसपेशियों में लचीलापन आता है और धीरे-धीरे आपको दर्द से आराम मिलेने लगता है। लेकिन दर्द ज्यादा होने की स्थि‍त‍ि में डॉक्टर सर्जरी की भी सलाह दे सकते हैं।

क्यों है जरूरी फिजियोथेरेपी?

बल्जिंग डिस्क में फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि इससे मांसपेशियों में लचीलापन आ जाता है और इससे दर्द से राहत मिलती है। अगर आप चाहते हैं कि आपको फिजियोथेरेपी का लंबे समय तक फायदा मिले तो इसके सभी सेशन पूरे करें।

बल्जिंग डिस्क से कैसे बचें?

बल्जिंग डिस्क से बचाव के लिए सबसे जरूरी है क‍ि आप अपने लाइफस्टाल पर ध्यान दें, ताक इस समस्या से बचा जा सके।

-इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक करने के लिए अच्‍छे डॉक्‍टर से परामर्श करें और नियमित दवाएं खाएं।
-एक ही पोजीशन में देर तक न बैठें।
-अपने वजन को कंट्रोल करें। अगर वजन ज्यादा है तो उसे घटाएं।
-एक्‍टिव रहें और डॉक्‍टर से सलाह लेकर व्‍यायाम जरूर करते रहें जैसे, वॉकिंग, स्‍विमिंग, योगा आदि।
-बैठने का तरीका हमेशा सही रखें। रीढ़ और डिस्क पर दबाव कम डालें।
-अपने आहार में ऐसे फल और सब्‍जियों को शामिल करें जो शरीर की सूजन को कम करे। साथ ही जंक फूड और तले भुने खाने से परहेज करें।

PunjabKesari

लाइफस्टाइल से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए डाउनलोड करें NARI APP

Related News