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महिला बैस्ट फ्रैंड होने के होते हैं ये फायदे (Pix)

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Views:- Sunday, November 20, 2016-5:25 PM

अक्सर यह कह दिया जाता है कि नारी की दुश्मननारी ही होती है, परंतु यदि आप सोचें तो एक नारी को अपने दिल की बात दूसरी नारी को बता कर ही सुकून मिलता है, कभी मां के आंचल की छांव में आकर वो दिल का बोझ हल्का करती है, तो कभी बहन का प्यार उसके दिल पर मलहम लगाता है, कभी सहेलियों की चुहलबाजी में वह दिल के राज ब्यां करती है, तो कभी ननद की शरारतों संग कॉलेज की बातें सांझा करती है और कभी अपनी बेटी के साथ बैठ कर छोटी-छोटी बातों की माला गूंधती है अर्थात एक नारी अपने खुशी और गम केवल दूसरी नारी से ही बांट सकती है। कोई रैसिपी पूछनी हो, शॉपिंग पर जाना हो, मूवी देखनी हो या फिर गॉसिप का पिटारा खोलना हो, ऐसे बहुत से कारण हैं जहां एक नारी को नारी की ही जरूरत महसूस होती है।

 

1. तनाव मुक्त रहने के लिए

महिलाओं से जुड़ी ऐसी कई बातें होती हैं, जिसे वे चाह कर भी पुरुषों से शेयर नहीं कर पातीं, ऐसे नाजुक समय में उन्हें किसी नारी के साथ की ही बहुत जरूरत होती है, फिर चाहे वह पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी कोई समस्या या संवेदनशील मुद्दा हो, हैल्थ संबंधी समस्या हो या फिर आपसी अहम् की बात हो, पति-पत्नी की आपसी कहा-सुनी हो, पारिवारिक सास-बहू, ननद-जेठानी से जुड़े वाद-विवाद हों या अविवाहित बेटी से तनाव हो, इन तमाम विषयों पर अपनी नजदीकी नारी से बात कर के ही एक नारी खुद को काफी हल्का महसूस करती है। अपने मन की बात दूसरी नारी से सांझी करने के बाद ही स्वयं को हल्का महसूस करती है तथा तनाव मुक्त हो जाती है।

 

2. जिम्मेदारियां निभाने के लिए

तीज-त्योहार हो या शादी-ब्याह का माहौल हो, उस समय इतने काम निकल आते हैं कि तब एक महिला को दूसरी महिलाओं की जरूरत महसूस होती है, कितनी ही रस्में हैं, जिन्हें केवल महिलाएं ही निभाती हैं और ऐसे मौकों पर कितने ही काम हैं, जिन्हें वे पूरी जिम्मेदारी से करती हैं। आज एक परिवार होने के कारण घर पर अधिकांशत: एक ही महिला होती है और जब उसे किसी रिश्तेदार या सहेली का साथ मिल जाता है, तो उसमें एक नई ऊर्जा का संचार हो जाता है। ये ऐसे मौके हैं, जहां आधुनिक होने के बावजूद भी महिलाएं एक साथ मिल कर अधिकांश कामों को सहजता से निपटा लेती हैं। अत: यह कहना गलत होगा कि केवल संगीत की महफिल ही महिलाओं के दम पर जमती है, बल्कि हर जिम्मेवारी वाला काम महिलाओं के साथ से ही संभव हो पाता है।

 

3. प्रशंसक भी आलोचक भी

हम भले ही कितने भी अच्छे और समझदार हों, परंतु कमी तो हर किसी में रहती है और एक नारी को दूसरी नारी से बेहतर कौन समझ सकता है, तभी तो नारी को अपनी प्रशंसा और आलोचना पर तभी विश्वास होता है, जब वह दूसरी नारी के मुंह से सुनती है, क्योंकि नारी ही दूसरी नारी को बेहतर ढंग से समझ सकती है या कोई बात कह सकती है। वह उससे कड़वा सच भी बिना लाग-लपेट के कहदेती है और प्रशंसा भी सहजता से कर देती है, अत: महिलाएं ही एक दूसरे की सही मायने में प्रशंसक एवं आलोचक होती हैं।

 

4. जब जीवन साथी से कहना संभव न हो

बहुत सी बातें हैं जो पत्नी अपने पति से नहीं कर पातीऔर बहुत सी बातों को सुनने का पति देव के पास भी वक्त नहीं होता, अपनी ही व्यस्तताओं में उलझे पति को पत्नी की बहुत सी बातें बेमानी लगती हैं और वह उन्हें या तो बेमन से सुनता है या फिर नजर अंदाज कर देता है। ऐसे में पत्नी की कोई बेस्ट फ्रेंड या फिर कोई करीबी महिला ही उसकी सबसे बड़ी राजदार होती है, जिससे वह अपनी बातें शेयर कर सकती है या वक्त निकाल कर उसे सुन सकती है। लंबी उम्र का राज महिलाओं की लंबी उम्र का राज भी शायद यही है कि वह अपने दिल की हर बात अपनी सहेलियों या महिला रिश्तेदारों के साथ सांझी कर लेती हैं, जिससे कि उनके जीवन में कोई टैंशन रहती ही नहीं है। यही नहीं वह अपनी सोशल लाईफ को भी बेहतरीन तरीके से जीती है। घर-गृहस्थी संभालना, सामाजिक कार्यक्रमों एवं फेस्टिवल में भाग लेना तथा सहेलियों के साथ हंसी-खुशी अपना हर बिता लेना ही उन्हें आदि हेल्दी, खुशमिजाज और खुशहाल लंबा जीवन जीने में मदद करता है।

 

5. प्रेरणा का दूसरा नाम

कहते हैं कि हर कामयाब पुरुष के पीछे किसी महिला का सहयोग होता है, परंतु यदि महिलाओं की सफलता की बात की जाए, तो एक नारी को आगे बढऩे और सफलता के मुकाम पर पहुंचाने वाली भी कोई दूसरी नारी ही होती है, वह भले ही उसकी मां, बहन, बेटी या फिर सहेली के रूप में ही क्यों न हो।

 

 


हेमा शर्मा