
बच्चों की एक उम्र के बाद उनसे देस्ता कर लेने से उनकी परवरिश करने में अासानी हो जाती है। एेसे करने से बच्चे अपने मन की बात अौर परेशानियां पेरेंट्स के साथ शेयर करने लगते है लेकिन बाप और बेटे की दोस्ती होना इतना आसान नहीं होता है क्योंकि पिता का नेचर धोड़ा गिस्से वाला होता है अौर कास कर बेटे के साथ एेसा होता है। अाइए जानते है अाखिर बाप अौर बेटे के बीच दोस्ती होना इतना मुश्किल क्यों होता है।
1.तुम अभी बच्चे हो
कहते है कि बेटे को पिता का जूता आने लगे तो बाप को उसे दोस्त बना लेना चाहिए। उसे ना समझ नहीं मानकर अपनी बातों और फैसलों मे शामिल करना चाहिए। नई जनरेशन गैप को भरने में अच्छा तरीका है।
2.कब समझोगे जिम्मेदारी?
कुछ पिता सोचते है कि उनका बेटा अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझता लेकिन एेसे में पिता को समझना चाहिए कि बदलते दौर मे अगर कोई चीज आपके मनमुताबिक नहीं हुई इसकी मतलब ये नहीं है कि बेटा गैरजिम्मेदार है।
3.तुम नहीं कर सकते ये काम
ज्यादातर पिता अपने बेटे को नाकारा समझते है अौर हर काम में उनको कहते है कि तुम किसी लायक नहीं हो। एेसे में बेटे का व्यक्तित्व तो खराब होता ही है साथ उसके रिश्तों पर भी बुरा असर पड़ने लगता है।
4.ये हैं तुम्हारे दोस्त?
जब बेटा अपने दोस्तों को अपने पापा से मिलवाता है तो ज्यादातर पिता का यह कहना होता है कि ये तेरे दोस्त है अौर उनकी बुराई करने लगते है। ये भी एक बहुत बड़ा कारण है कि लड़के अपने पापा के ज्यादा अच्छे दोस्त नहीं बन पाते है।
5.बस आवारागर्दी करते रहो
लड़के है तो दोस्तों के साथ घूमगें फिरना तो होता है। एेसे में पापा हाथ धोकर उनके पीछें ही पड़ जाते है। एेसे में पिता को समझना चाहिए कि पिता का भरोसा न दिखाना, बे-मतलब शक करना उन्हें परेशान कर देता है। इसी वजह से बेटा अपने पिता से दूर रहने लगता है।